मनगवां तहसील में उठा गौ सम्मान का स्वर, गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने सौंपा गया ज्ञापन
मनगवां/रीवा, 27 अप्रैल 2026। रीवा जिले के मनगवां तहसील प्रांगण में सोमवार को ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान नेताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने एकत्र होकर गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित किए जाने की मांग उठाई। इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार मनगवां को सौंपा गया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गौवंश का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में गौमाता को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने हेतु सरकार को ठोस पहल करनी चाहिए। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि गौमाता को संवैधानिक और राष्ट्रीय स्तर पर विशेष दर्जा प्रदान किया जाए।
बड़ी संख्या में जुटे सामाजिक कार्यकर्ता व किसान प्रतिनिधि
तहसील प्रांगण में आयोजित इस अभियान में क्षेत्र के अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता और किसान संगठन से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से सोशल एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र तिवारी, रविकांत अग्निहोत्री, अधिवक्ता विनोद पांडेय, भारतीय किसान संघ से हर्ष गौतम, अनिल उपकारी तथा भारतीय किसान संघ जिला रीवा के उपाध्यक्ष बृजभूषण मिश्रा शामिल रहे। इसके अतिरिक्त कई अन्य नागरिकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
संस्कृति और आस्था से जुड़ा मुद्दा बताया
अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन की आधारशिला भी हैं। गौवंश संरक्षण से जैविक खेती, दुग्ध उत्पादन, ग्रामीण रोजगार और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बल मिलता है। इसलिए गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करना देश की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा विषय है।
शासन स्तर पर निर्णय की प्रतीक्षा
ज्ञापन सौंपने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि केंद्र एवं राज्य सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी। कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण वातावरण में अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई गई।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना अभियान
मनगवां तहसील में आयोजित यह अभियान क्षेत्रभर में चर्चा का विषय बना रहा। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि गौ संरक्षण और सम्मान का मुद्दा जनमानस में विशेष स्थान रखता है। अब देखना होगा कि इस मांग पर शासन-प्रशासन स्तर पर आगे क्या पहल होती है।
