गंगेव जनपद पंचायत में बढ़ा असंतोष: सीईओ और अध्यक्ष की कार्यप्रणाली के खिलाफ सदस्यों ने खोला मोर्चा
शासकीय राशि के दुरुपयोग, बैठकों में अनियमितता और विकास कार्यों में मनमानी के लगाए गंभीर आरोप
रीवा जिले की गंगेव जनपद पंचायत इन दिनों भारी विवादों के केंद्र में आ गई है। जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्यों ने जनपद अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) की कार्यप्रणाली के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। लंबे समय से उपेक्षा, मनमानी और भ्रष्टाचार के आरोपों से नाराज सदस्यों ने आंदोलन की राह अपनाते हुए सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया तथा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मनगवां को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में सदस्यों ने आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत गंगेव में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और शासकीय धन का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। सदस्यों का कहना है कि पंचायत की सामान्य सभा एवं सामान्य प्रशासन समिति की बैठकें लंबे समय से नहीं बुलाई जा रही हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है।
20 माह से सामान्य सभा की बैठक नहीं
ज्ञापन के अनुसार जनपद अध्यक्ष एवं सीईओ द्वारा लगभग 20 माह से सामान्य सभा की बैठक आयोजित नहीं की गई। वहीं सामान्य प्रशासन समिति की बैठक भी करीब दो वर्षों से नहीं हुई है। सदस्यों का आरोप है कि बिना बैठक और बिना अनुमोदन के ही करोड़ों रुपये की योजनाओं एवं विकास कार्यों का संचालन किया जा रहा है।
वित्त राशि वितरण में पारदर्शिता पर सवाल
आंदोलन कर रहे जनपद सदस्यों ने 15वें वित्त आयोग एवं 5वें वित्त आयोग की राशि के वितरण पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किस पंचायत को कितनी राशि दी गई और किन कार्यों में खर्च की गई, इसकी जानकारी मांगने के बावजूद आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और गहरा गई है।
चुनिंदा पंचायतों में विकास कार्य, भारी भ्रष्टाचार के आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जनपद अध्यक्ष एवं सीईओ द्वारा कुछ चिन्हित पंचायतों में ही विकास कार्यों के नाम पर भारी भरकम राशि खर्च की जा रही है, जबकि अधिकांश पंचायतें मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही हैं। सदस्यों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं है और राशि का उपयोग नियमों के विपरीत किया जा रहा है।
पेयजल और बिजली संकट से जूझ रहा क्षेत्र
जनपद क्षेत्र के कई गांवों में पेयजल और बिजली की गंभीर समस्या बनी हुई है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी समस्या सुनने तक को तैयार नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मोटर पंप सेट जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिससे आम जनता परेशान है।
बिना अनुमोदन राशि आवंटन का आरोप
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सामान्य सभा की स्वीकृति के बिना ही मनमाने तरीके से राशि आवंटित की जा रही है। इतना ही नहीं, ग्राम पंचायतों को निर्माण एजेंसी बनाने के बजाय कार्यों को सीधे आरईएस को सौंपा जा रहा है, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका समाप्त होती जा रही है।
जनपद सदस्यों के मानदेय पर भी सवाल
सदस्यों ने आरोप लगाया कि शासन से मानदेय की राशि समय-समय पर प्राप्त होने के बावजूद जनपद सदस्यों को नियमित मानदेय नहीं दिया जा रहा है। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
दुकानों के आवंटन में अनियमितता का आरोप
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जनपद पंचायत परिसर स्थित कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की दुकानों का आवंटन बिना जनपद सदस्यों की जानकारी और अनुमोदन के कर दिया गया, जो नियमों के विपरीत है।
निष्पक्ष जांच की मांग, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
गंगेव जनपद पंचायत में उठे इन गंभीर आरोपों के बाद क्षेत्रीय राजनीति भी गरमा गई है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि आखिर इन आरोपों की जांच कब और कैसे होती है।


