कैथा पंचायत में करोड़ों की योजनाओं पर भ्रष्टाचार का साया! जांच में वित्तीय अनियमितता प्रमाणित, कार्रवाई पर
सवाल जनपद CEO के हटाने के निर्देश के बाद भी सचिव पर मेहरबानी? जिला पंचायत स्तर पर फाइल दबाने के आरोप तेज
सोलर लाइट, नाली निर्माण, बाउंड्रीवाल सहित कई कार्यों में अनियमितता उजागर, ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
रीवा, 01 जून 2026।
जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत ग्राम पंचायत कैथा एक बार फिर कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर चर्चा के केंद्र में है। पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपए के कथित गबन और वित्तीय हेराफेरी के आरोपों ने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जब जांच में वित्तीय अनियमितता प्रमाणित हो चुकी है, राशि की वसूली तक की जा चुकी है, तब आखिर दोषियों पर निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
ग्राम पंचायत कैथा के प्रभारी सचिव महेश पटेल पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में बिना कार्य कराए शासकीय राशि का आहरण किया गया। शिकायतों और जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, पंचायत में सोलर लाइट स्थापना, नाली निर्माण, बाउंड्रीवाल निर्माण सहित कई विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। आरोप है कि कई योजनाओं में कागजों में काम दिखाकर सरकारी धन का भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य अधूरे या संदिग्ध पाए गए।
शिकायत के बाद खुली परतें, जांच में सामने आई गड़बड़ियां
जानकारी के अनुसार ग्राम कैथा निवासी चन्द्रभूषण पटेल ने 18 मार्च 2026 को जनपद पंचायत गंगेव में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर पंचायत में व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग की जांच की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पंचायत के एकल खाते (Single Account) से बिना वास्तविक कार्य कराए राशि निकाली गई और शासकीय धन के उपयोग में गंभीर गड़बड़ी की गई।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में जिला पंचायत स्तर पर हुई जांच में भी वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद संबंधित सचिव से लाखों रुपए की वसूली की कार्रवाई भी की गई। लेकिन सवाल यह है कि यदि वित्तीय गबन और अनियमितता प्रमाणित थी, तो अब तक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या केवल राशि वसूली कर देना ही भ्रष्टाचार के मामलों का समाधान माना जा रहा है?
जनपद CEO ने दिखाई सख्ती, तीन दिन में मांगी थी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत गंगेव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्राची चौबे ने 23 मार्च 2026 को आधिकारिक पत्र जारी कर दो सदस्यीय जांच दल गठित किया था। जांच टीम में तरूणेन्द्रशेखर पाण्डेय (PCO) और शुभम उपाध्याय (ADEO) को शामिल किया गया।
जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि ग्राम पंचायत कैथा में सचिव महेश पटेल के कार्यकाल के दौरान एकल खाते से आहरित एवं व्यय की गई राशि की विस्तृत जांच कर तीन दिवस के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए, ताकि दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जा सके। इस पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर रीवा और जिला पंचायत CEO को भी भेजी गई थी, जिससे यह मामला उच्च स्तर की निगरानी में माना जा रहा था।
फिर क्यों अटक गई कार्रवाई? जिला पंचायत CEO की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल जिला पंचायत स्तर पर कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि जनपद पंचायत द्वारा सचिव महेश पटेल को हटाने एवं दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने के बावजूद, जिला पंचायत स्तर पर फाइल आगे नहीं बढ़ रही है।
सूत्रों का दावा है कि सचिव को हटाने संबंधी प्रस्ताव लंबे समय से जिला पंचायत कार्यालय में लंबित पड़ा हुआ है। एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होना कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभाव और रसूख के कारण संबंधित सचिव को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे पंचायत में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
कैथा पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रमाणित भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह पूरे पंचायत तंत्र में गलत संदेश जाएगा। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री, संभागायुक्त, कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यही है—
क्या कैथा पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार पर प्रशासन निर्णायक कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा?




