विंध्य वसुंधरा समाचार की खबर का असर: 2 घंटे में हरकत में आया प्रशासन, ग्राम पंचायत गढ़ में दोबारा शुरू हुआ रुका निर्माण कार्य
विंध्य वसुंधरा समाचार की खबर के बाद सीईओ प्राची चौबे और जनपद अध्यक्ष विकास तिवारी ने दिखाई सख्ती, जिम्मेदारों को लगाई फटकार
रीवा/गंगेव। जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़ में बदहाल विकास व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर विंध्य वसुंधरा समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित खबर का बड़ा असर देखने को मिला। समाचार प्रकाशित होने के महज दो घंटे के भीतर प्रशासन हरकत में आया और लंबे समय से अधूरा पड़ा नाली निर्माण कार्य दोबारा शुरू करा दिया गया। इससे ग्रामीणों में राहत और खुशी का माहौल देखने को मिला है।
दरअसल, ग्राम पंचायत गढ़ के बस्ती बाजार क्षेत्र में लगभग एक माह पूर्व शुरू हुआ नाली निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया था, जिससे पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था फैल गई थी। नाली निर्माण के लिए सड़क खोद दिए जाने के बाद काम बंद हो गया, जिससे गढ़ पुरानी बाजार को पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया था। स्थानीय लोग, व्यापारी, स्कूली छात्र-छात्राएं और बुजुर्ग रोजाना भारी परेशानी का सामना कर रहे थे।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ने लगी थी। लोगों का आरोप था कि बार-बार शिकायतों के बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अधूरी नाली और खुदी सड़क किसी भी समय दुर्घटना को निमंत्रण देती नजर आ रही थी। ग्रामीणों का कहना था कि यदि रात के समय कोई राहगीर, बच्चा या बुजुर्ग हादसे का शिकार हो जाता, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेता?
कुएं में जा रहा था गंदा पानी, बढ़ा स्वास्थ्य संकट
ग्रामीणों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया था कि बस्ती क्षेत्र का गंदा पानी सीधे गांव के कुएं में जा रहा था, जिससे पेयजल दूषित होने की आशंका बढ़ गई थी। भीषण गर्मी में जहां गांव पहले से जल संकट झेल रहा है, वहीं दूषित पानी से बीमारी फैलने का खतरा भी मंडरा रहा था। इससे ग्रामीणों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ती जा रही थीं।
ग्राम निवासी राजू खान सहित कई ग्रामीणों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि गांव में विकास कार्य बेहद सुस्त गति से चल रहे हैं। नाली खोदकर छोड़ दी गई, लेकिन बाद में किसी जिम्मेदार ने सुध नहीं ली। कोई सचिव का हवाला देता, कोई ठेकेदार का, तो कोई सरपंच का नाम लेकर जिम्मेदारी से बचता नजर आया।
विंध्य वसुंधरा समाचार की खबर का बड़ा असर
ग्राम पंचायत गढ़ की बदहाल स्थिति और ग्रामीणों की पीड़ा को विंध्य वसुंधरा समाचार द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गंगेव प्राची चौबे और जनपद अध्यक्ष विकास तिवारी ने संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई
बताया गया कि अधिकारियों की सख्ती का असर तत्काल देखने को मिला और 31 मई 2026 को शाम लगभग 4 बजे अधूरा पड़ा निर्माण कार्य दोबारा शुरू करा दिया गया। लंबे समय से बंद पड़े कार्य के शुरू होते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और अधिकारियों की तत्परता की सराहना की।
ग्रामीणों ने जताई खुशी, कहा— खबर ने दिलाई राहत
ग्रामीणों ने कहा कि यदि मीडिया ने इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से नहीं उठाया होता, तो शायद समस्या लंबे समय तक जस की तस बनी रहती। लोगों ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर संतोष जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि अब निर्माण कार्य समय पर पूरा होगा और गांव को मूलभूत समस्याओं से राहत मिलेगी।
हालांकि, अब भी ग्रामीणों का कहना है कि केवल कार्य शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता और समयसीमा के साथ इसे पूरा कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि अधूरा विकास आखिर कब पूरी तरह जमीन पर नजर आएगा।
डस्ट युक्त बालू, पतली सरिया और घटिया गिट्टी से बन रही नाली?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में डस्ट मिश्रित बालू, मानक से पतली सरिया और पहाड़ों से निकली कमजोर गुणवत्ता वाली गिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआत से ही गुणवत्ता से समझौता किया गया, तो करोड़ों नहीं तो लाखों की सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद यह नाली पहली बारिश में ही जवाब दे सकती है।
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा आम हो चुकी है कि “जो नाली अभी बन रही है, आखिर वह कितने साल टिकेगी?” लोगों का कहना है कि यदि निर्माण में मानकों का पालन नहीं हुआ, तो यह कार्य विकास कम और सरकारी धन की बर्बादी ज्यादा साबित होगा।
क्या सिर्फ कैमरे और शिकायत शांत करने के लिए शुरू हुआ काम?
गांव के लोगों में यह भी चर्चा है कि प्रशासनिक फटकार के बाद कार्य केवल इस उद्देश्य से चालू किया गया ताकि शिकायतों और मीडिया में उठ रहे सवालों को कुछ समय के लिए शांत किया जा सके। लेकिन मौके की स्थिति देखकर ग्रामीणों को आशंका है कि कहीं यह “कागजों में विकास, जमीन पर समझौता” वाली कहानी न बन जाए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए, उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता की पड़ताल हो तथा संबंधित इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करें। उनका कहना है कि यदि अभी निगरानी नहीं हुई, तो बाद में जिम्मेदार फिर एक-दूसरे पर आरोप डालते नजर आएंगे और नुकसान जनता को उठाना पड़ेगा।





