बीहर नदी में गिरे बाउंड्री वॉल के मलबे से बढ़ा बाढ़ का खतरा, एडवोकेट बी.के. माला ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग
रीवा। रीवा जिले की जीवनदायिनी (बीहर) नदी के नदी तल में नियमों की अनदेखी कर किए गए निर्माण कार्य अब शहर के लिए गंभीर खतरे का कारण बनते जा रहे हैं। नदी के अंदर भाग में अवैध एवं नियम विरुद्ध तरीके से निर्मित बाउंड्री वॉल के गिर जाने से उसका भारी मात्रा में मलबा नदी की धारा में फैल गया है। इससे नदी का प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो रहा है, जिससे आगामी वर्षा ऋतु में रीवा शहर में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
जनहित के इस गंभीर विषय को उठाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट बी.के. माला ने आयुक्त, रीवा संभाग, कलेक्टर रीवा एवं एसडीएम रीवा को अलग-अलग आवेदन पत्र सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि यदि समय रहते नदी के भीतर गिरे बाउंड्री वॉल के मलबे को नहीं हटाया गया तो वर्षा के दौरान नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ेगा और जल निकासी बाधित होने के कारण शहर के कई निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो सकती है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में किया गया निर्माण पूरी तरह नियमों के विपरीत है। बाउंड्री वॉल के ढहने के बाद उसका मलबा नदी की धारा में जमा हो गया है, जिससे पानी के बहाव में अवरोध उत्पन्न हो रहा है। यदि समय रहते इस मलबे को नहीं हटाया गया तो तेज बारिश के दौरान पानी का दबाव बढ़ेगा और उसका दुष्प्रभाव पूरे रीवा शहर के जनजीवन पर पड़ सकता है। इससे लोगों के घरों, कृषि भूमि, सड़कों एवं अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एडवोकेट बी.के. माला ने प्रशासन से मांग की है कि मानसून के दौरान किसी भी संभावित आपदा से बचने के लिए तत्काल नदी का निरीक्षण कराया जाए तथा नदी के अंदर गिरे समस्त मलबे को युद्धस्तर पर हटाया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि मलबा हटाने में आने वाला पूरा व्यय संबंधित बाउंड्री वॉल का निर्माण कराने वाली एजेंसी अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों से ही वसूला जाए, ताकि सरकारी धन पर अनावश्यक भार न पड़े और भविष्य में कोई भी व्यक्ति नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ करने का साहस न करे।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस मामले में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो संभावित बाढ़ की स्थिति के लिए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

