गढ़, तहसील मनगवा, जिला रीवा (म.प्र.)
रीवा जिले के ऐतिहासिक गढ़ ग्राम में अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही का आलम इतना बढ़ गया है कि अब यह जनता के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। स्वतंत्रता से पहले 1946 में यहां थाना, आयुर्वेदिक अस्पताल और विद्यालय जैसे संस्थान स्थापित किए गए थे। लेकिन विकास के इस युग में, आज़ादी के इतने साल बाद भी, यह क्षेत्र गंदगी, अतिक्रमण और सरकारी अव्यवस्थाओं का शिकार बना हुआ है।
गढ़ ग्राम पंचायत, मनगवा विधानसभा क्षेत्र में आता है, जो प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं की कर्मभूमि रही है। कुंवर रुक्मणी रमन प्रताप सिंह, यमुना प्रसाद शास्त्री और श्रीनिवास तिवारी जैसे प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि यहां से जुड़े रहे हैं। बावजूद इसके, गढ़ में विकास की बजाय अराजकता का माहौल है। सरकारी संपत्तियों पर कब्जे, अवैध निर्माण और गंदगी ने गांव का स्वरूप बिगाड़ दिया है, और प्रशासन की अनदेखी ने स्थिति को और बदतर बना दिया है।
सरकारी संपत्ति पर कब्जा और अवैध बिक्री का खेल
गढ़ में स्थित थाना, पंचायत भवन, महिला प्रशिक्षण केंद्र, आयुर्वेदिक औषधालय, प्राथमिक स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल जैसी कई सरकारी संपत्तियों के आसपास अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के किनारे स्थित इन कार्यालयों के चारों ओर बाजार क्षेत्र में भू-माफियाओं ने राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लिया है और कई मामलों में अवैध बिक्री भी कर दी है। इस खेल में सत्ताधारी दल के नेताओं की संलिप्तता की चर्चाएं भी जोरों पर हैं, जो प्रशासन की कार्रवाई पर प्रभाव डाल रही हैं।
संकरी सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा
बाजार क्षेत्र में सड़क किनारे दुकानों और ठेलों की भरमार ने सड़कों को संकरा कर दिया है, जिससे आम लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। यहां तक कि कई बार गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासनिक आदेशों के बावजूद अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण अधूरी रह जाती है, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है।
समाजसेवी प्रभात चंद द्विवेदी की कड़ी प्रतिक्रिया
गढ़ की इस गंभीर स्थिति पर स्थानीय समाजसेवी और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात चंद द्विवेदी ने प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन सच्चे मन से कार्रवाई करे और राजनीतिक दबाव को नजरअंदाज करे, तो गढ़ को अतिक्रमण मुक्त किया जा सकता है। उनका मानना है कि जनता अब इस अराजकता से तंग आ चुकी है और ठोस कार्रवाई की मांग कर रही है।
प्रश्नचिह्न के घेरे में विकास: क्या गढ़ को मिलेगी अतिक्रमण से मुक्ति?
गढ़ की जनता के मन में अब एक ही सवाल है: क्या उनका गांव अतिक्रमण से मुक्त होकर विकास की राह पर आगे बढ़ सकेगा, या हमेशा इसी उपेक्षा का शिकार बना रहेगा? जनता को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या का समाधान करेगा और गढ़ को स्वच्छ, व्यवस्थित और सुरक्षित बनाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन और प्रशासन इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाते हैं, ताकि गढ़ अपने गौरवशाली इतिहास के अनुरूप विकास की नई इबारत लिख सके।

