(रीवा जिले से विशेष ख़बर)
रीवा, मनगवा रीवा जिले की तहसील मनगवा के उप तहसील वृत्त गढ़ में राजस्व निरीक्षक गौरीशंकर मिश्रा की कार्यशैली से स्थानीय निवासियों और किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है। जनता का कहना है कि उनसे संपर्क करने पर फोन का जवाब नहीं मिलता और कई बार यह कहकर टाल दिया जाता है कि "मेरे पास और भी काम हैं।" क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि राजस्व निरीक्षक अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में उपस्थित नहीं रहते और ज्यादातर समय रीवा या मऊगंज से कार्य संचालन करते हैं।
किसानों से जबरन किरायेदारी के बयान लिखवाने का आरोप
क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि राजस्व निरीक्षक द्वारा किसानों से दबावपूर्वक यह लिखवा लिया जाता है कि वे उनके कमरे में किरायेदार हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई लोगों ने मजबूरी में यह बयान दे दिया है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
अतिक्रमण कार्रवाई में अनियमितता, गलत प्रतिवेदन का आरोप
अतिक्रमण के मामलों में भी राजस्व निरीक्षक पर लापरवाही और अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं। तहसीलदार द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश दिए जाने के बावजूद कई स्थानों पर अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजस्व निरीक्षक ने गलत प्रतिवेदन प्रस्तुत कर भूमि को शासकीय न दिखाने का प्रयास किया, जबकि वास्तव में अतिक्रमण सरकारी भूमि पर हुआ है।
सार्वजनिक मार्ग पर अवैध कब्जे का मामला
क्षेत्र के निवासियों ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के पास स्थित एक शासकीय औषधालय के आम रास्ते को निजी जमीन घोषित कर दिया गया है, जबकि रास्ते पर सार्वजनिक अधिकार था। ऐसे विवादास्पद प्रतिवेदन के कारण जनता में राजस्व विभाग के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है।
भूमि विवाद और नक्शों में गड़बड़ियां, जनता में आक्रोश
किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि भूमि नंबर 144 पर राजस्व रिकॉर्ड और नक्शे में गंभीर गड़बड़ियां हैं। सरकारी कार्यालयों और भवनों की सही स्थिति दर्ज नहीं है, जिससे वहां पर विवाद उत्पन्न हो रहे हैं। जनता का कहना है कि नक्शे में दर्ज भूमि से अधिक स्वामित्व दिखाया गया है, जो कि राजस्व निरीक्षक की अनियमितताओं का प्रमाण है।
जनता ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
क्षेत्रीय जनता ने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि राजस्व निरीक्षक की कार्यशैली और आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जनता का कहना है कि यदि दोषी अधिकारियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और कमजोर होगा।
प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए न्याय की मांग
यह मामला सिर्फ शिकायतों का नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। जनता को उम्मीद है कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की गहनता से जांच करेंगे और दोषियों पर उचित कार्रवाई करेंगे ताकि क्षेत्र में न्याय और पारदर्शिता स्थापित हो सके।
यह समाचार जनता की शिकायतों पर आधारित है; इसकी सटीकता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।)


