मध्यप्रदेश रीवा जिले में धान खरीदी व्यवस्था चरमराई: किसान संकट में
रीवा जिले में इस वर्ष बंपर धान उत्पादन के बावजूद खरीदी प्रक्रिया में व्याप्त अव्यवस्था ने किसानों को भारी परेशानी में डाल दिया है। जिले में 2 दिसंबर 2024 से शुरू हुई धान खरीदी अब तक सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पाई है। 12 दिसंबर तक भी हालात संशयपूर्ण बने हुए हैं। कई खरीदी केंद्रों में धान खरीदी बाधित है, तो कुछ केंद्रों ने अपनी असमर्थता जाहिर कर दी है।
केंद्रों में अव्यवस्था से हताश किसान
खरीदी केंद्रों पर प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। जिन केंद्रों पर धान की खरीदी हो रही है, वहां धान के उठाव में भारी समस्याएं आ रही हैं। उठाव न होने के कारण केंद्रों पर धान का जमाव बढ़ रहा है, जिससे जगह की कमी हो गई है। इससे कई केंद्रों पर धान की खरीदी बंद करनी पड़ी है।
वाहनों की लंबी कतारें और ठंड का कहर
खरीदी केंद्रों के बाहर धान लाने वाले किसानों और वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। कड़ाके की ठंड में किसान खुले आसमान के नीचे इंतजार करने को मजबूर हैं। प्रशासन द्वारा किसी तरह की राहत या व्यवस्था नहीं की जा रही है। कई किसानों को तो रात-दिन केंद्रों पर रुकना पड़ रहा है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ गई है।
किसानों को मजबूरी में सस्ते दाम पर धान बेचना पड़ रहा
समस्याओं से घबराए किसान अब बिचौलियों को सस्ते दामों पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं। खरीदी केंद्रों पर न तो टोकन समय पर जारी हो रहे हैं और न ही खरीदी की प्रक्रिया सही ढंग से चल रही है। जहां टोकन जारी हो भी रहे हैं, वहां भी धान के उठाव में देरी के कारण केंद्र अव्यवस्था का शिकार हैं।
प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का अभाव
इस संबंध में नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने बैठक का हवाला देकर फोन रिसीव नहीं किया। जिले में धान खरीदी की निगरानी के लिए कई विशेष निरीक्षण टीमें बनाई गई हैं, लेकिन उनके प्रतिवेदन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे किसानों की समस्याओं का समाधान अधर में लटका हुआ है।
किसानों की आय दोगुनी करने का सपना धूमिल
धान खरीदी में आ रही परेशानियों ने किसानों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने का जो वादा किया गया था, वह इस स्थिति में अधूरा ही लगता है। किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, और वे बिचौलियों के शोषण का शिकार हो रहे हैं।
जरूरी कदम उठाने की मांग
इस समस्या का समाधान निकालना सरकार और प्रशासन के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।
1. उठाव की प्रक्रिया को तेज किया जाए: धान के उठाव के लिए पर्याप्त वाहन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
2. खरीदी केंद्रों की क्षमता बढ़ाई जाए: केंद्रों पर अतिरिक्त गोदाम और भंडारण की व्यवस्था की जाए।
3. प्रभावी निरीक्षण प्रणाली लागू हो: निरीक्षण टीमों की रिपोर्ट पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
4. किसानों के लिए राहत व्यवस्था हो: ठंड से बचाव के लिए केंद्रों पर अस्थायी शेड, अलाव और भोजन की व्यवस्था की जाए।
जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सरकार को इस समस्या पर गंभीरता से विचार कर तत्काल कदम उठाने चाहिए। किसानों को राहत देने और धान खरीदी की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए प्रशासन की सक्रियता बेहद जरूरी है।

