विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा: त्यौंथर SDM कार्यालय में रिश्वतखोरी का पर्दाफाश, लोकायुक्त ने रीडर को किया गिरफ्तार, वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
दिनांक: 13 दिसंबर 2024, रीवा, मध्य प्रदेश
रीवा जिले के त्यौंथर तहसील स्थित एसडीएम कार्यालय में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। एसडीएम के रीडर शशि कुमार विश्वकर्मा को लोकायुक्त की टीम ने 14,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह रिश्वत नक्शा सुधार, तरमीम और भू-अभिलेखों को दुरुस्त कराने के लिए मांगी गई थी। इस घटना ने न केवल कार्यालय के रीडर बल्कि पूरे सिस्टम, विशेष रूप से वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
लोकायुक्त की टीम ने शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की। आरोप था कि रीडर शशि कुमार विश्वकर्मा एसडीएम के नाम पर सेवाओं के बदले रिश्वत मांग रहा था। ट्रैप की कार्रवाई के दौरान, लोकायुक्त टीम ने उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। यह मामला तहसील और जिला प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक और कड़ी जोड़ता है।
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि किसी भी कार्यालय में रिश्वतखोरी केवल कनिष्ठ कर्मचारियों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति या मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है।
> "कोई भी कनिष्ठ कर्मचारी वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर खुलेआम रिश्वत कैसे मांग सकता है? कहीं न कहीं इस पूरे खेल में बड़े अधिकारियों की सहमति या भूमिका जरूर होती है।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल आरोपी रीडर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पिछली घटनाओं से सबक लेने की जरूरत
रीवा जिले में रिश्वतखोरी के कई मामले हाल ही में सामने आए हैं।
1. भू-अर्जन कार्यालय में रिश्वतखोरी: जिला कलेक्टर कार्यालय के भू-अर्जन विभाग में एक बाबू को रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त ने गिरफ्तार किया था।
2. मऊगंज का मामला: मऊगंज जिला कलेक्टर कार्यालय में एडिशनल कलेक्टर अशोक ओहरी को भी रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया गया था।
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं है। इसमें अक्सर बड़े अधिकारियों की भूमिका छिपी रहती है, जिनकी जांच और जवाबदेही तय किए बिना इस समस्या का समाधान असंभव है।
सख्त कार्रवाई की कमी से भ्रष्टाचार को बढ़ावा
शिवानंद द्विवेदी ने सवाल उठाया कि रिश्वतखोरी के मामलों में दोषियों पर समयबद्ध और कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि
> "अक्सर रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारी-कर्मचारियों को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया जाता है और फिर उन्हें मलाईदार पदों पर बहाल कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, बल्कि ईमानदार अधिकारियों और जनता के विश्वास को भी तोड़ती है।"
उन्होंने यह भी कहा कि लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में चालान दाखिल करने में अत्यधिक देरी होती है, जिससे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर हो जाती है।
भ्रष्टाचार पर रोक के लिए सुधार जरूरी
शिवानंद द्विवेदी ने सुझाव दिया कि:
1. वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय हो: किसी भी कार्यालय में रिश्वतखोरी की घटना में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच अनिवार्य हो।
2. त्वरित कार्रवाई: दोषियों पर जल्द से जल्द कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।
3. पुनर्बहाली पर रोक: रिश्वत के मामलों में दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों को दोबारा सेवा में न रखा जाए।
4. सुधारात्मक प्रक्रियाएं: शासन-प्रशासन को भ्रष्टाचार रोकने के लिए कठोर और पारदर्शी प्रक्रियाओं को लागू करना चाहिए।
क्या भ्रष्टाचार का यह सिलसिला रुकेगा?
रीवा जिले में आए दिन सामने आने वाले रिश्वतखोरी के मामलों ने जनता का प्रशासन पर विश्वास डगमगा दिया है। शिवानंद द्विवेदी ने कहा कि:
> "जब तक वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक रिश्वतखोरी का यह सिलसिला नहीं रुकेगा।"
जनता का सवाल: कब बदलेगा सिस्टम?
शासन और प्रशासन की निष्क्रियता के चलते भ्रष्टाचार का यह सिलसिला जारी है। जनता के मन में यह सवाल है कि आखिर कब सिस्टम में सुधार होगा और भ्रष्टाचार के इस चक्र को तोड़ा जाएगा।


