रीवा जिले में परिवहन विभाग में गहराता भ्रष्टाचार: अवैध वसूली और पदस्थापना पर उठे सवाल
रीवा, 12 जनवरी 2025
रीवा जिले में परिवहन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विभाग में लंबे समय से पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी पर आरोप है कि उनके मार्गदर्शन में वायरल हो रही एक सूची के लक्ष्य पूर्ति हेतु अवैध वसूली के नाके प्रारंभ करना विभाग की मजबूरी बन गई थी। इस विषय पर पूर्व में भी कई बार समाचार पत्रों में रिपोर्ट प्रकाशित हो चुकी है, परंतु विभागीय कार्रवाई का कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
रीवा जिले का परिवहन विभाग विवादों का केंद्र बिंदु बना हुआ है। चाहे हनुमना चेक पोस्ट हो या कर सोहागी पहाड़ चेक पोस्ट, समय-समय पर इन स्थानों पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनआक्रोश देखने को मिला है। विभिन्न राजनैतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार धरना-प्रदर्शन किए गए, लेकिन धरना समाप्त होने के बाद किस प्रकार से मामले शांत हुए, यह आज भी सवालों के घेरे में है।
हाल ही में वायरल हो रही सूची की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन सूची में दर्ज विवरण निश्चित ही चिंताजनक हैं। यह भ्रष्टाचार केवल परिवहन विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि पंजीयन रजिस्टार कार्यालय, आबकारी विभाग, खनिज विभाग, पंचायत विभाग, और सहकारिता विभाग जैसे कई अन्य सरकारी विभागों में भी व्यापक पैमाने पर नियमों की अनदेखी और अवैध कार्यों का बोलबाला है।
राजनीति और भ्रष्टाचार का गठजोड़
सूत्रों के अनुसार, रीवा जिले के एक जनप्रतिनिधि द्वारा यह कथन भी सामने आया था कि "15 लाख तक का भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचार नहीं बल्कि शिष्टाचार है।" उनका तर्क था कि पंचायत चुनावों में 10 लाख रुपये तक का खर्च होता है, और इसके बाद आगामी चुनावों की तैयारी के लिए धन की आवश्यकता होती है। जब पंचायत स्तर पर ही इतना खर्च होता है तो विधानसभा और लोकसभा चुनावों में करोड़ों-अरबों रुपये खर्च होते हैं। इस खर्च की पूर्ति के लिए ही विभिन्न विभागों द्वारा जनता से शोषण किया जाता है, और अधिकारियों को खुलेआम अवैध वसूली की छूट मिल जाती है।
जनता की उम्मीदों पर पानी फिरता भ्रष्टाचार
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जनता ने उम्मीद की थी कि देश का विकास जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से होगा और जनता का भला होगा। लेकिन भ्रष्टाचार और धन की राजनीति ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। आज वही जनप्रतिनिधि शक्तिशाली बनता है, जिसके पास काली कमाई के मजबूत स्रोत होते हैं। जनता का सेवक अब केवल नाम का जनप्रतिनिधि रह गया है।
जांच की आवश्यकता
वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह आवश्यक हो गया है कि रीवा जिले के परिवहन विभाग में पदस्थ अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जाए। यह देखा जाए कि कौन-कौन अधिकारी कितने वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, कितनी बार उनका स्थानांतरण हुआ और कितनी बार स्थानांतरण आदेश निरस्त किए गए। इसके साथ ही, यह भी जांच होनी चाहिए कि विभाग में कार्यरत कई कर्मचारी किस प्रकार से अवैध रूप से दूसरों के नाम पर आबकारी और खनिज की दुकानें संचालित कर रहे हैं।
यदि समय रहते इस भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह व्यापम जैसे बड़े घोटाले का रूप ले सकता है। फिलहाल, जनता की निगाहें प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी हुई हैं कि वे इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं।
अब देखना यह है कि रीवा जिले के परिवहन विभाग में फैले इस भ्रष्टाचार का अंत कब और कैसे होता है।

