चार वर्षीय मासूम घर से लापता, चाइल्ड हेल्पलाइन 1090 की तत्परता से दो घंटे में सुरक्षित मिला
माता-पिता के लिए उनका बच्चा उनकी दुनिया होता है, लेकिन जब वही बच्चा अचानक लापता हो जाए तो पूरे परिवार की हालत दयनीय हो जाती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया जब एक चार वर्षीय बच्चा घर से गुम (लापता) हो गया। परिवार ने अपने स्तर पर पूरी कोशिश की, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली तो पुलिस की मदद ली गई।
बच्चे की गुमशुदगी से माता-पिता की हालत खराब
रीवा जिले के लोरी नंबर 2 गांव निवासी रामखेलावन साकेत अपनी पुत्री उर्मिला साकेत के साथ थाना प्रभारी अवनीश पांडे के पास पहुंचे और बेहद व्याकुल स्वर में बताया कि 15 फरवरी 2025 को दोपहर 3:00 बजे से उनका चार वर्षीय बेटा घर से लापता है। उन्होंने बताया कि घर और आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की गई, लेकिन शाम 6:00 बजे तक भी बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला।
बच्चे की छोटी उम्र को देखते हुए पुलिस ने मामले की गंभीरता को प्राथमिकता दी। थाना प्रभारी अवनीश पांडे ने तत्काल एक पुलिस टीम का गठन कर बच्चे की तलाश शुरू कर दी।
पुलिस ने की तेजी से खोजबीन
बच्चे को खोजने के लिए सहायक निरीक्षक हनुमानदीन वर्मा, उप निरीक्षक के एल बागरी , आरक्षक सुहेल खान, रवि तिवारी सहित पूरी पुलिस टीम को सक्रिय किया गया। आसपास के इलाकों में सघन जांच शुरू की गई। इसी दौरान चाइल्ड हेल्प नंबर 1090, भोपाल से सूचना प्राप्त हुई कि एक चार वर्षीय बच्चा रोते हुए अगड़ाल क्षेत्र में घूम रहा है।
छोटा बच्चा 6 किलोमीटर दूर कैसे पहुंचा, बना रहस्य
पुलिस के लिए यह सवाल बना हुआ है कि सिर्फ चार वर्ष का बच्चा 6 किलोमीटर दूर अगड़ाल तक कैसे पहुंचा? क्या कोई उसे लेकर गया था या फिर वह खुद भटकते हुए वहां तक पहुंचा? इस पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है।
मां की गोद में लौटते ही छलके आंसू
पुलिस टीम तुरंत बताए गए स्थान पर पहुंची और बच्चे को सुरक्षित बरामद किया। बच्चे को उसकी मां उर्मिला साकेत एवं नाना रामखेलावन साकेत की उपस्थिति में सौंप दिया गया। बच्चे को देखते ही मां ने उसे गले से लगा लिया और भावुक होकर रो पड़ी।
परिवार ने चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस का जताया आभार
बच्चे को सही-सलामत वापस पाकर पूरे परिवार ने पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन 1090 का आभार व्यक्त किया। अगर चाइल्ड हेल्प नंबर पर सूचना नहीं दी जाती, तो बच्चे को ढूंढने में अधिक समय लग सकता था और किसी भी अनहोनी की संभावना बनी रहती।
चाइल्ड हेल्पलाइन 1090 बनी संजीवनी
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि मध्य प्रदेश सरकार की चाइल्ड हेल्पलाइन (1090) अत्यंत प्रभावी और कारगर साबित हो रही है। चाइल्ड हेल्प नंबर पर दी गई जानकारी के कारण ही मात्र दो घंटे के भीतर बच्चा अपने परिवार से मिल सका।यह घटना एक उदाहरण है कि आपातकालीन सेवाएं किस प्रकार संकट की घड़ी में त्वरित सहायता प्रदान कर सकती हैं। पुलिस प्रशासन और चाइल्ड हेल्पलाइन की मुस्तैदी ने एक परिवार को उनका खोया हुआ बच्चा वापस दिलाकर सुकून प्रदान किया।






