33 कोटि देवताओं का निवास गोमाता की सेवा करें, गोमाता धरा पर हैं साक्षात देव - आचार्य गौरीशंकर शुक्ला
शिवमहापुराण महायज्ञ 2025 का दसवां दिन
(विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा, मप्र | 25 फरवरी 2025)
कैथा स्थित अति प्राचीन हनुमान-शिव मंदिर प्रांगण में चल रहे 11 दिवसीय श्री शिवमहापुराण महायज्ञ के दसवें दिन भक्तों ने शिवमहापुराण के विभिन्न कथा प्रसंगों का रसास्वादन किया। कथा वाचक आचार्य डॉ. गौरीशंकर शुक्ला के सुमधुर वचनों से प्रवाहित अमृतमयी कथा का श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर श्रवण किया।
गोमाता और नंदी: मानवीय सभ्यता की आधारशिला
कथा के दौरान आचार्य जी ने गोमाता की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गोमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि मानवीय सभ्यता एवं संस्कृति की आधारशिला हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि यदि गोमाता न होतीं, तो इस धरती पर सभ्यता की कल्पना भी असंभव थी। उन्होंने बताया कि जन्म के बाद माँ के दूध के उपरांत, जीवनभर मनुष्य जिस दूध पर निर्भर रहता है, वह गोमाता का ही होता है।
भारतीय धर्मग्रंथों में गाय को विशेष स्थान प्राप्त है, इसलिए इसे ‘माता’ की उपमा दी गई है। जिस प्रकार माता अपने शिशु का पोषण करती हैं, वैसे ही गोमाता भी संपूर्ण मानव जाति का पालन करती हैं। गोमाता के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है—ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं समस्त देवगण इसमें समाहित हैं। अतः गोसेवा ही धरती पर सबसे बड़ी पूजा है, क्योंकि इसमें सभी देवी-देवताओं की आराधना समाहित हो जाती है। प्रत्येक परिवार को चाहिए कि वे गोमाता को अपने घर में स्थान दें एवं उनका पालन-पोषण करें।
आचार्य जी ने बताया कि गोमाता के केवल दूध में ही नहीं, बल्कि गोबर और मूत्र में भी अद्भुत औषधीय गुण होते हैं। पंचगव्य, जो धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होता है, गोमाता से ही प्राप्त होता है। वैज्ञानिक शोधों ने भी सिद्ध किया है कि गोमूत्र के नियमित सेवन से कैंसर, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, जोड़ दर्द, पेट संबंधी विकारों से मुक्ति मिल सकती है। यह सस्ता एवं सर्वसुलभ औषधि स्वरूप है, जो कई गंभीर बीमारियों का निवारण कर सकता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से गोमांश भक्षण से प्राकृतिक असंतुलन
आचार्य जी ने बताया कि वैज्ञानिक शोधों में यह प्रमाणित हो चुका है कि गोमांस भक्षण करने वाले अनेक प्रकार की शारीरिक बीमारियों से ग्रसित होते हैं, जिनमें हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह एवं कैंसर जैसी बीमारियाँ प्रमुख हैं। इसके विपरीत, शुद्ध शाकाहारी जीवनशैली अपनाने से व्यक्ति लंबी एवं निरोगी आयु प्राप्त कर सकता है।उन्होंने यह भी बताया कि यदि उच्च रक्तचाप की समस्या हो तो गोमाता के पीठ पर हाथ फेरने से तत्काल राहत मिलती है। अतः हमें अपनी संस्कृति एवं सनातन परंपरा के अनुसार गोसेवा को अपनाना चाहिए।
शिव के वाहन नंदी आज भी उपेक्षित
भगवान शिव के प्रिय वाहन नंदी की दुर्दशा का उल्लेख करते हुए आचार्य जी ने कहा कि आज मनुष्य नंदी को सम्मान देने के बजाय उनका तिरस्कार कर रहा है। नंदी, जो शिव के प्रिय वाहन हैं, आज प्रताड़ित किए जा रहे हैं, उनकी अवहेलना हो रही है। यदि मानव समाज इस कृत्य से बाज नहीं आया, तो चाहे वह कितनी भी पूजा-अर्चना करे, शिव कृपा प्राप्त नहीं होगी।उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में हम शिव भक्ति करना चाहते हैं, तो हमें नंदी को सम्मान देना होगा, गोमाता की सेवा करनी होगी, अन्यथा हमारे धार्मिक अनुष्ठान मात्र दिखावा बनकर रह जाएँगे और हमें उनके वास्तविक फलों की प्राप्ति नहीं होगी।
मानव सभ्यता की कठिन परीक्षा है यह युग
आचार्य जी ने कहा कि कलियुग मानव की कठिन परीक्षा ले रहा है। इसमें वही व्यक्ति सफल होगा, जो शुद्ध हृदय एवं सच्ची श्रद्धा के साथ धर्म का पालन करेगा। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे माता-पिता और गोमाता की सेवा करें, अपने इष्टदेव की आराधना एवं नामजप करें तथा अपने जीवन को सफल बनाएं।
महाशिवरात्रि पर विशाल भंडारे का आयोजन
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री शिवमहापुराण महायज्ञ के अंतर्गत 26 फरवरी को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है।




