रीवा: किराना व्यापार में करोड़ों की टैक्स चोरी, मिलावटखोरी और प्रशासन की अनदेखी
बिना रसीद और टैक्स चोरी से फल-फूल रहा व्यापार, मिलावटी सामान से उपभोक्ताओं की सेहत पर खतरा
रीवा। जिले में किराना व्यापार में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और मिलावटखोरी हो रही है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। बिना रसीद के व्यापार और मिलावटी सामान की बिक्री प्रशासन की लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण के कारण लगातार बढ़ती जा रही है।
टैक्स चोरी: हर दिन करोड़ों रुपये की हेराफेरी
रीवा जिले के किराना बाजार में टैक्स चोरी का खेल चरम पर है। व्यापारियों द्वारा ग्राहकों से टैक्स के पैसे तो वसूले जाते हैं, लेकिन बिल नहीं दिया जाता, जिससे सरकार को मिलने वाला राजस्व निजी जेबों में जा रहा है।
टैक्स चोरी के मुख्य कारण:
1. बिना बिल का व्यापार: किराना व्यापारी ग्राहकों को रसीद नहीं देते, जिससे जीएसटी चोरी होती है।
2. नकद लेन-देन: अधिकतर व्यापार नकद में होता है ताकि टैक्स विभाग की नजर से बचा जा सके।
3. बिना टैक्स चुकाए माल की आपूर्ति: रीवा से रोज़ ट्रकों में भरकर टैक्स चोरी वाला माल सप्लाई किया जाता है।
4. प्रशासन की अनदेखी: अधिकारियों की मिलीभगत से व्यापारियों को खुली छूट मिली हुई है।
मिलावटी और घटिया सामान से जनता को धोखा
रीवा जिले की किराना दुकानों पर मिलावटी और घटिया गुणवत्ता वाला सामान खुलेआम बेचा जा रहा है।
प्रमुख मिलावटखोरी के उदाहरण:
शक्कर: सल्फर युक्त मिलावटी शक्कर, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।
साबूदाना: उच्च गुणवत्ता के दाम पर सस्ता और घटिया साबूदाना बेचा जा रहा है।
मसाले: धनिया, मिर्च, हल्दी, जीरा आदि में रंग और केमिकल मिलाकर बेचा जाता है।
काजू-बादाम: असली के नाम पर सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले सूखे मेवे बेचे जा रहे हैं।
गुटखा और पान मसाला की काला बाज़ारी
रीवा जिले में पान मसाला और गुटखा का अवैध व्यापार भी खूब फल-फूल रहा है।
बिना रसीद के गुटखा बिक्री: राजश्री, आग, सिग्नेचर, सरपंच जैसे ब्रांड खुलेआम बेचे जा रहे हैं, लेकिन इन पर जीएसटी की चोरी हो रही है।
ट्रकों में भरकर सप्लाई: हर दिन ट्रकों में गुटखा और किराना सामान की तस्करी होती है, जिसमें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत की खबरें भी हैं।
प्रशासन और राजनीतिक संरक्षण की भूमिका
राजनीतिक संरक्षण: टैक्स चोरी और मिलावटखोरी में संलिप्त व्यापारी राजनीतिक दलों को चंदा देकर अपने लिए सुरक्षा कवच तैयार कर लेते हैं।
प्रशासन की उदासीनता: खाद्य विभाग और जीएसटी विभाग इस पूरे खेल से वाकिफ होते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे।
मीडिया और विपक्ष की चुप्पी: मीडिया और विपक्षी दलों की निष्क्रियता भी इस समस्या को बढ़ा रही है।
एक्सपायरी सामान की बिक्री से उपभोक्ताओं की सेहत को खतरा
बिस्किट, टॉफी, कुरकुरे, ब्रेड, तेल, नमकीन जैसे खाद्य पदार्थ एक्सपायरी होने के बावजूद बेचे जा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक धोखाधड़ी हो रही है, जहां उपभोक्ताओं को जागरूकता की कमी होती है।
खाद्य विभाग कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा, जिससे व्यापारियों के हौसले बुलंद हैं।
अब सवाल उठता है:
1. क्या प्रशासन इन टैक्स चोरों पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा?
2. क्या मिलावटी और एक्सपायरी सामान बेचने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा?
3. क्या बिना रसीद के गुटखा और किराना सामान बेचने वालों को रोका जाएगा?
जनता से अपील
अगर आप भी इस तरह की धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं या किराना व्यापार में टैक्स चोरी और मिलावटखोरी की जानकारी रखते हैं, तो आवाज उठाएं।
सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाएं।
प्रशासन और मीडिया से शिकायत करें।
जनहित याचिका दायर कर सकते हैं।
केवल जागरूक जनता ही इस संगठित लूट को रोक सकती है!
(इस समाचार की पुष्टि विंध्य वसुंधरा समाचार नहीं करता स्थानीय लोगों के बताए अनुसार यह ख़बर बनाई गई है। जांच उपरांत ही वास्तविकता का पता चल पाएगा।)







