जंगल में नकली सीमेंट बनाने का भंडाफोड़: लाखों की सीमेंट जब्त, पाँच आरोपी गिरफ्तार
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मऊगंज मध्य प्रदेश:
नईगढ़ी थाना क्षेत्र में पुलिस ने नकली सीमेंट बनाने के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। जंगल में गुप्त रूप से संचालित इस अवैध कारोबार पर पुलिस की छापेमारी में लाखों रुपए की नकली सीमेंट जब्त की गई, जबकि पाँच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस गोरखधंधे के मुख्य दो आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। इस नकली सीमेंट को रीवा और मऊगंज के विभिन्न डीलरों को सप्लाई किया गया था, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस उन डीलरों का भी खुलासा करेगी जो इस गोरखधंधे में संलिप्त हैं?
गोपनीय सूचना पर पुलिस की छापेमारी
यह घटना रीवा जिला मुख्यालय से 65 किलोमीटर दूर, नेशनल हाईवे-30 से लगभग 5 किलोमीटर पूर्व, घूमा-नईगढ़ी मार्ग स्थित जंगल में सामने आई। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इस इलाके में बड़े पैमाने पर नकली सीमेंट तैयार और पैक की जा रही है।
मऊगंज पुलिस अधीक्षक रसना ठाकुर के निर्देशन में नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर और एसडीओपी मऊगंज के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी की। मौके पर भारी मात्रा में नकली सीमेंट तैयार की जा रही थी, जिसे ट्रैक्टरों में भरकर रीवा और मऊगंज के डीलरों को सप्लाई किया जाना था। पुलिस ने नकली सीमेंट की बोरियों को जब्त कर लिया और पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पहले भी हो चुका है खुलासा, फिर भी जारी था गोरखधंधा
नकली सीमेंट का यह कारोबार कोई नया नहीं है। इससे पहले भी विंध्य वसुंधरा समाचार पत्र ने मनगवां, नईगढ़ी और सोहागी थाना क्षेत्रों में नकली सीमेंट के गोरखधंधे को उजागर किया था। गढ़ थाना क्षेत्र में भी पुलिस ने पहले नकली सीमेंट के कारखाने पर कार्रवाई की थी, लेकिन इसके बावजूद यह अवैध कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ।
सूत्रों के अनुसार, स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत और सीमेंट कंपनियों की लापरवाही इस गोरखधंधे के लगातार फलने-फूलने की प्रमुख वजह है। घटिया गुणवत्ता की सीमेंट से बने मकान और सड़कें जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान होता है और निर्माण स्थायित्व भी प्रभावित होता है।
कैसे बनाई जाती थी नकली सीमेंट और कहाँ सप्लाई होती थी?
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी सरकारी सप्लाई से मिलने वाली असली सीमेंट खरीदते थे। फिर उसमें राखड़, मिट्टी और अन्य घटिया पदार्थ मिलाकर उसकी गुणवत्ता खराब कर दी जाती थी। इसके बाद इस मिश्रण को असली सीमेंट कंपनियों की बोरियों में पैक कर ऊँचे दामों पर बेचा जाता था।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि रीवा और मऊगंज में किन-किन डीलरों को यह नकली सीमेंट सप्लाई की गई, कितनी मात्रा में सप्लाई हुई, और क्या पुलिस इसका भी खुलासा कर पाएगी? आमतौर पर ऐसे छापे के बाद कुछ दिनों तक सक्रियता बनी रहती है, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। अब देखना होगा कि इस बार केवल नकली सीमेंट जब्त कर मामला खत्म किया जाएगा, या फिर उन डीलरों पर भी कार्रवाई होगी जो इस गोरखधंधे में संलिप्त हैं।
पुलिस अधीक्षक रसना ठाकुर ने कहा:
"गुप्त सूत्रों से सूचना मिली थी कि जंगल में अवैध रूप से नकली सीमेंट बनाई जा रही है। पुलिस ने तीन दिन तक छापेमारी अभियान चलाया और मौके से लाखों रुपए की नकली सीमेंट जब्त की। अभी तक पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य दो आरोपी फरार हैं। इनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर ने बताया:
"वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर उनके निर्देशानुसार कार्रवाई की गई। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए हैं। मौके से बड़ी मात्रा में नकली सीमेंट की पैक और खाली बोरियां जब्त की गई हैं। इस तरह की अवैध गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।"
अब बड़ा सवाल – क्या इस बार डीलरों पर होगी कार्रवाई?
यह कोई पहली बार नहीं है जब नकली सीमेंट का कारोबार उजागर हुआ हो। पहले भी कई बार कार्रवाई की गई, लेकिन कुछ समय बाद यह फिर से शुरू हो जाता है। प्रशासन और सीमेंट कंपनियों की लापरवाही इस समस्या को और बढ़ा रही है।
अब देखना यह होगा कि क्या पुलिस केवल नकली सीमेंट जब्त कर मामले को बंद कर देगी, या फिर उन डीलरों का भी खुलासा होगा जो इस गोरखधंधे में संलिप्त हैं?




