स्वस्थ महिला ही सशक्त महिला
✍️ डॉ. बी.एल. मिश्रा
सेवानिवृत्त क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएँ, रीवा संभाग, रीवा
8 मार्च को हर वर्ष विश्वभर के 189 देशों में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया यह दिन महिलाओं के सशक्तीकरण, समानता, उनके अधिकारों की सुरक्षा और उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। वर्ष 2025 की थीम भी "महिला अधिकारों और सशक्तीकरण को गति देना" है।
महिलाएँ समाज की आधारशिला हैं। वे माँ, बहन, बेटी, पत्नी और दादी-नानी के रूप में हर परिवार और समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जिस प्रकार साइकिल एक पहिए पर नहीं चल सकती, उसी प्रकार बिना महिलाओं के समाज और राष्ट्र की उन्नति संभव नहीं।
लेकिन क्या वास्तव में महिलाएँ सशक्त हैं? क्या उन्हें उनके अधिकार और सम्मान मिल पा रहे हैं? यदि नहीं, तो इसके पीछे क्या कारण हैं और इसे कैसे सुधारा जा सकता है? इस लेख में हम महिला सशक्तीकरण की बाधाओं, उनके स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों और इनके समाधान पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
महिला सशक्तीकरण: आवश्यक क्यों?
महिला सशक्तीकरण का अर्थ है—महिलाओं को उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, समानता, आर्थिक स्वतंत्रता, सुरक्षा और न्याय का अधिकार देना। यदि महिलाएँ आत्मनिर्भर होंगी, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
"माँ के साथ ममता मिलती, बहन से मिलता दुलार,
नारी शक्ति को पूजनीय समझो, यह लगाती जीवन की नैया पार।"
लेकिन वर्तमान समय में महिलाओं को कई सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जो उनके सशक्तीकरण की राह में बाधक बन रही हैं।
महिला सशक्तीकरण में प्रमुख बाधाएँ
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लैंगिक असमानता और पुरुष प्रधान मानसिकता
- भारत में आज भी कई परिवारों में बेटियों को समान अवसर नहीं मिलते।
- घर से लेकर कार्यस्थल तक महिलाओं को भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
- समाज में लड़कों को अधिक महत्व दिया जाता है, जिससे कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न होती है।
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शिक्षा में असमानता
- देश में पुरुषों की साक्षरता दर 83% है, जबकि महिलाओं की 69%।
- कई ग्रामीण इलाकों में बेटियों को स्कूल भेजने से पहले उनके विवाह की चिंता की जाती है।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू है, लेकिन इसे सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।
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स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
- 5 वर्ष तक की बालिकाओं की मृत्यु दर बालकों की तुलना में 11% अधिक है।
- 56% किशोरियाँ एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं।
- गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पोषण और चिकित्सा सुविधाएँ नहीं मिल पातीं।
- स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों की शीघ्र जाँच और उपचार की सुविधा हर जगह उपलब्ध नहीं है।
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राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी में कमी
- लोकसभा में कुल 542 सीटों में मात्र 78 महिलाएँ (14%) और राज्यसभा में 224 में केवल 24 महिलाएँ (10.7%) हैं।
- मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 में से केवल 27 महिलाएँ (11.7%) विधायक हैं।
- महिलाओं को समान अवसर देने के लिए संसद और विधानसभाओं में 30% आरक्षण की आवश्यकता है।
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कार्यस्थल पर भेदभाव और असुरक्षा
- कई क्षेत्रों में महिलाओं को समान काम के लिए पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है।
- कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न एक गंभीर समस्या है।
- महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षा, गरिमा और सम्मान मिलना चाहिए।
महिलाओं का स्वास्थ्य और उनसे जुड़ी समस्याएँ
"स्वस्थ महिला ही सशक्त महिला होती है।"
लेकिन भारत में महिलाओं का स्वास्थ्य अभी भी एक गंभीर चिंता का विषय है। महिलाओं को स्वस्थ और सक्षम बनाने के लिए निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है—
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बचपन और किशोरावस्था में स्वास्थ्य समस्याएँ
- 5 वर्ष तक की बालिकाओं की मृत्यु दर अधिक है।
- किशोरियों में खून की कमी (एनीमिया) की समस्या व्यापक रूप से फैली हुई है।
- स्कूलों और गाँवों में आयरन और फोलिक एसिड की गोलियाँ नियमित रूप से उपलब्ध करानी चाहिए।
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गर्भवती महिलाओं की देखभाल
- गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को उचित पोषण और चिकित्सा सुविधाएँ मिलनी चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होनी चाहिए।
- प्रसव से पहले और बाद में माँ और बच्चे की देखभाल सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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गंभीर बीमारियों की रोकथाम और इलाज
- स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की शीघ्र पहचान और उपचार के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
- महिलाओं में टीबी, मलेरिया, डायबिटीज़, हृदय रोग जैसी बीमारियों की जल्द जाँच और उपचार की सुविधा होनी चाहिए।
- प्रत्येक जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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बुजुर्ग और विधवा महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
- विधवा और वृद्ध महिलाओं को पोषण, पेंशन और आवास की उचित व्यवस्था मिलनी चाहिए।
- बुजुर्ग महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
महिला सशक्तीकरण के लिए आवश्यक कदम
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शिक्षा को प्राथमिकता दें
- हर लड़की को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा मिले।
- उच्च शिक्षा के लिए लड़कियों को विशेष छात्रवृत्ति दी जाए।
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स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करें
- हर गाँव और कस्बे में महिला स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जाएँ।
- महिलाओं के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और दवाओं की सुविधा उपलब्ध हो।
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सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को मजबूत करें
- महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर त्वरित न्याय दिया जाए।
- कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी बढ़ाई जाए
- संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
- महिलाओं को स्वरोज़गार और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाएँ चलाई जाएँ।
महिला सशक्तीकरण केवल एक नारा नहीं बल्कि राष्ट्र की उन्नति का आधार है। जब महिलाएँ शिक्षित, सुरक्षित और स्वस्थ होंगी, तभी समाज और देश का सही मायने में विकास होगा। महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और अवसर देकर ही एक बेहतर समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।
"जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है।"
✍️ डॉ. बी.एल. मिश्रा
📞 9424974800

