गढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत लोरी नंबर 2 में अज्ञात कारणों से लगी आग, किसानों को भारी नुकसान – ग्रामीणों की तत्परता से टली बड़ी दुर्घटना, फायर ब्रिगेड की लापरवाही पर उठे सवाल
गढ़ थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत लोरी नंबर 2 में 21 अप्रैल 2025 को दोपहर लगभग 2 बजे अचानक उस समय हड़कंप मच गया जब एक खेत में आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में किसान मुन्ना भारती के खेत में रखे गेहूं के बोझे, समर्शियल पंप की पाइपें और मोटर की तारें जलकर राख हो गईं। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण आग ने तेजी से आसपास के खेतों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों की सूझबूझ से टली बड़ी दुर्घटना
ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 2 बजे खेत से उठते धुएं को देखकर लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए। जल स्रोतों की कमी के बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी और खेतों में मौजूद कुओं और बोरिंग से पाइप जोड़कर पानी निकालते हुए आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया। कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग बुझा ली गई।
इस घटना में केवल मुन्ना भारती ही नहीं, बल्कि रज्जन मिश्रा नामक किसान का भूसा भी पूरी तरह जल गया। साथ ही खेतों की जैविक परत को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे आगामी फसल की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
फायर ब्रिगेड की लापरवाही पर उठे सवाल
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि घटना की जानकारी मिलने के बावजूद फायर ब्रिगेड समय पर मौके पर नहीं पहुंची। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार कॉल करने के बावजूद फायर ब्रिगेड की टीम नहीं आई। जब उनसे संपर्क किया गया, तो यह जवाब मिला कि "गाड़ी में डीजल नहीं है", इसलिए मौके पर नहीं पहुंच सकते। इस गैरजिम्मेदाराना रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
वरिष्ठ नागरिकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि आग और विकराल रूप ले लेती, तो क्या प्रशासन इसी तरह मूकदर्शक बना रहता? यह घटना फायर ब्रिगेड की जवाबदेही और संसाधनों की उपलब्धता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
प्रशासन से मुआवजे और ठोस कार्रवाई की मांग
पीड़ित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए और फायर ब्रिगेड की लापरवाही की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में फायर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता भी जताई गई है।
गढ़ थाना क्षेत्र में फायर ब्रिगेड की अनुपलब्धता पर चिंता
उल्लेखनीय है कि मनगवां से गढ़ की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है, और गढ़ थाना क्षेत्रफल में काफी बड़ा होने के बावजूद यहां एक भी फायर ब्रिगेड तैनात नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि फायर ब्रिगेड रवाना भी होती, तब तक पूरा खेत जलकर खाक हो चुका होता। इसलिए ग्रामीणों ने आग्रह किया है कि गढ़ थाने में कम से कम एक फायर ब्रिगेड स्थायी रूप से तैनात की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से समय रहते निपटा जा सके।
यह घटना यह सोचने पर विवश करती है कि आपातकालीन सेवाएं खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कितनी कमजोर हैं। यदि ग्रामीण समय पर हस्तक्षेप न करते, तो यह आग एक गंभीर त्रासदी का रूप ले सकती थी।



