सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: सिया के रेगुलेशन होंगे अनिवार्य, क्रेशर संचालकों के लिए 31 मार्च 2025 अंतिम तिथि
नई दिल्ली/भोपाल। माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अब क्रेशर संचालकों को ‘दिया’ के पुराने नियमों की बजाय ‘सिया’ के नए रेगुलेशन को पूरी तरह से अपनाना अनिवार्य होगा। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और अवैध उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
एनजीटी में दायर जनहित याचिका बनी बदलाव की वजह
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) न्यायालय, मध्य प्रदेश, भोपाल में पर्यावरणविद एवं अधिवक्ता बीके माला द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में रीवा, सतना एवं अन्य क्षेत्रों में हो रहे भारी पर्यावरण प्रदूषण एवं अवैध उत्खनन के मामलों को उजागर किया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, इन गतिविधियों के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा था, जिससे पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही थी।
एनजीटी न्यायालय ने इस याचिका की गहराई से जांच की और पाया कि कई क्रेशर इकाइयां पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं कर रही थीं। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी क्रेशर संचालकों को ‘दिया’ रेगुलेशन की जगह ‘सिया’ रेगुलेशन को अपनाना अनिवार्य होगा। इस आदेश के तहत कई क्रेशर संचालकों पर भारी पर्यावरणीय पेनल्टी भी लगाई गई।
वरिष्ठ सामाजिक आरटीआई कार्यकर्ता बीके माला द्वारा पर्यावरण के संरक्षण हेतु अकेले लड़ाई लड़ी जिसमें वो विजय हुए
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: आदेश को बरकरार रखते हुए अंतिम अवसर दिया
एनजीटी के इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रदेश सरकार और क्रेशर संचालकों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में अपील दायर की। इस अपील की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी न्यायालय, भोपाल के आदेश को पूरी तरह से सही ठहराया और इसे यथावत रखते हुए क्रेशर संचालकों को नए नियमों के तहत ऑनलाइन पंजीयन कराने का अंतिम अवसर प्रदान किया।
31 मार्च 2025 तक पंजीयन अनिवार्य, अन्यथा संचालन होगा अवैध
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के तहत प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि क्रेशर संचालकों को 31 मार्च 2025 तक ‘सिया’ रेगुलेशन का पूर्ण अनुपालन करना होगा। इस तिथि के बाद यदि किसी क्रेशर संचालक ने नए नियमों का पालन नहीं किया तो उसका संचालन अवैध घोषित कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में होगा पूर्ण क्रियान्वयन
अब यह नया पर्यावरणीय रेगुलेशन केवल मध्य प्रदेश में ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी प्रभावी रूप से लागू होगा। तीनों राज्यों की सरकारों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी क्रेशर संचालक इन नियमों का पालन करें। यदि कोई भी संचालक नियमों की अवहेलना करता है, तो उसके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे और भारी दंड लगाया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कदम
सरकार एवं पर्यावरणविदों का मानना है कि इस निर्णय से प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और अवैध खनन पर सख्त रोक लगेगी। क्रेशर संचालकों को नए रेगुलेशन के अनुरूप अपने दस्तावेजों को अपडेट करने का यह अंतिम अवसर प्रदान किया गया है।
सरकार ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि वे किसी क्षेत्र में अवैध उत्खनन या पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन होता देखें, तो इसकी तुरंत सूचना संबंधित विभागों को दें।
(विशेष रिपोर्ट) विंध्य वसुंधरा समाचार


