रीवा-मऊगंज में शराब कारोबारियों की दबंगई चरम पर! नियम-कानून ताक पर, शासन-प्रशासन मौन, जनता बेहाल
विंध्य वसुंधरा संवाददाता | रीवा/मऊगंज | 14 अप्रैल 2025
मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल से लागू हुई नई शराब दुकानों की व्यवस्था अपने प्रारंभिक दिनों में ही भारी विवादों और अनियमितताओं से घिर गई है। खासकर रीवा और मऊगंज जिले में शराब कारोबार ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है।
MRP से ऊपर वसूली, उपभोक्ताओं की जेब पर डाका
स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कई शराब दुकानों पर शराब की बिक्री निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कहीं अधिक कीमतों पर हो रही है। दुकानों पर 20 से 100 रुपये तक की अवैध वसूली आम बात हो गई है। यह न केवल उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े करता है।
शराब माफिया का दबदबा और सत्ता का संरक्षण
सूत्रों की मानें तो रीवा और मऊगंज में शराब ठेके कुछ गिने-चुने प्रभावशाली गुटों के कब्जे में हैं। आश्चर्यजनक रूप से ये वही लोग हैं जो कुछ वर्ष पहले तक आर्थिक रूप से सामान्य स्थिति में थे, लेकिन आज अरबों के कारोबार के संचालन में लगे हुए हैं। आरोप हैं कि इनके पीछे राजनीतिक रसूख और नौकरशाही का अप्रत्यक्ष संरक्षण है।
विशेष रूप से परिवहन विभाग से जुड़े एक प्रभावशाली अधिकारी के परिजनों के दर्जनों शराब ठेके चलाने की खबरें चर्चा में हैं, जो सत्ता-धन गठजोड़ की गंभीर तस्वीर पेश करती है।
प्रशासनिक फेरबदल नाकाम, माफिया बेलगाम
हाल में हुई प्रशासनिक सर्जरी से जनता को उम्मीद थी कि नशा कारोबार पर लगाम लगेगी। लेकिन इसके विपरीत, अब यह कारोबार और भी संगठित हो चुका है। पुलिस और आबकारी विभाग की निष्क्रियता से जनता में आक्रोश व्याप्त है।
जनता के सवाल: वसूली की रकम जा रही है कहाँ?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि दुकानों पर की जा रही अवैध वसूली केवल सेल्समैन की आय नहीं है, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा अधिकारियों और रसूखदार नेताओं की जेब तक पहुँच रहा है। जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती, इन आरोपों की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन प्रशासन की चुप्पी संदेह को गहराती है।
जनता की माँग: सख्त कार्यवाही, पारदर्शी जांच
विंध्य वसुंधरा समाचार यह स्पष्ट करता है कि वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि उसके स्तर पर नहीं की गई है। यदि ये वीडियो प्रमाणित होते हैं, तो दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई अविलंब की जानी चाहिए। और यदि ये वीडियो भ्रामक हैं, तो उन्हें प्रसारित करने वालों पर भी कठोर कार्यवाही होनी चाहिए।
यदि प्रशासन ने शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह स्थिति केवल रीवा-मऊगंज तक सीमित नहीं रहेगी – यह पूरे प्रदेश में नशे की महामारी का रूप ले सकती है। "नशा मुक्त भारत" और "जनकल्याण" के सपनों को साकार करने के लिए अब ज़रूरी है कि कानून की ताकत दिखे – वरना जनता का भरोसा टूट जाएगा।


