सीधी जिले में खनिज रॉयल्टी घोटाले का खुलासा: प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
विंध्य वसुंधरा समाचार सीधी (म.प्र.)
जिले के बहरी थाना क्षेत्र में खनिज रॉयल्टी को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है, जो प्रशासन और खनिज विभाग की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। गोपत नदी के किनारे स्थित कोल यार्ड (स्टॉक यार्ड) में अवैध रूप से कोयला भंडारण और दो नंबर के व्यापार का सिलसिला लंबे समय से जारी है। स्थानीय सूत्रों और दस्तावेज़ों के अनुसार, यूनाइटेड इन्फ्रास्ट्रक्चर नामक संस्था के संचालक शुभम नेमा, निवासी बहरी, तथा उसका जीजा मनोज सक्सेना, निवासी भोपाल, इस पूरे रैकेट का संचालन कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि ये लोग सिंगरौली स्थित एनसीएल (Northern Coalfields Limited) से कोयला प्राप्त कर फर्जी रॉयल्टी टीपी (Transit Pass) तैयार कर कोल यार्ड में डाल रहे हैं। इस प्रक्रिया में न तो वैध दस्तावेजों का पालन किया जा रहा है और न ही शासन को किसी प्रकार का राजस्व दिया जा रहा है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये की हानि हो रही है।
स्थानीय मीडिया की चेतावनी भी बेअसर
यह कोई छिपी हुई गतिविधि नहीं है। स्थानीय समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों द्वारा इस विषय पर कई बार विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित और प्रसारित की गई है। इसके बावजूद जिला प्रशासन, कलेक्टर कार्यालय और खनिज विभाग की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। सवाल यह है कि क्या प्रशासनिक चुप्पी इस अवैध कारोबार को अप्रत्यक्ष संरक्षण दे रही है?
रीवा से जुड़ी घटना ने खोली पोल
घोटाले की पुष्टि तब और मजबूत हो गई जब रीवा जिले के एक स्क्रैप यार्ड में खड़ी एक गाड़ी UP63-T-8880 की फर्जी रॉयल्टी टीपी 15 अप्रैल 2025 को लगभग 3:30 बजे दोपहर में कटवा दी गई। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस गाड़ी ने कोयला कभी लोड ही नहीं किया, उसकी टीपी कटाई गई, जिससे साफ होता है कि रॉयल्टी टीपी प्रणाली का गलत उपयोग कर सरकारी प्रणाली को धोखा दिया जा रहा है।
गाड़ी मालिक की शिकायत, लेकिन बहरी थाना में सुनवाई नहीं
इस मामले को लेकर गाड़ी के मालिक राजीव कुमार साहू, निवासी बहरी, ने बहरी थाना में लिखित शिकायत प्रस्तुत की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से अवैध टीपी कटाई और अपनी गाड़ी के नाम के दुरुपयोग का जिक्र किया है। लेकिन, कई दिनों के बीत जाने के बावजूद न तो पुलिस द्वारा कोई एफआईआर दर्ज की गई, और न ही प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई की गई।
प्रशासन की भूमिका संदिग्ध, जनता में आक्रोश
इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन और खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जब स्थानीय स्तर पर इतना बड़ा घोटाला सामने आ रहा है, समाचार माध्यमों में रिपोर्ट हो चुकी है, तब भी जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता इस ओर इशारा करती है कि या तो वे उदासीन हैं या फिर जानबूझकर आँखें मूंदे बैठे हैं।
मांग: उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ एफआईआर, संपत्ति ज़ब्ती और लाइसेंस निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
यदि प्रशासन समय रहते नहीं जागा, तो यह मामला न सिर्फ राजस्व की हानि का कारण बनेगा, बल्कि सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर भी प्रश्नचिह्न लगाएगा।



