रीवा-मऊगंज में शराब माफियाओं का कहर! MRP से ऊँची वसूली, सत्ता संरक्षण में बेलगाम कारोबार, प्रशासन मौन, जनता त्रस्त
विंध्य वसुंधरा विशेष रिपोर्ट | रीवा/मऊगंज | 19 अप्रैल 2025
मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल 2025 से लागू हुई नई शराब दुकान नीति जहां राज्य सरकार द्वारा राजस्व वृद्धि और वितरण में पारदर्शिता के उद्देश्य से लाई गई थी, वहीं इसके लागू होते ही रीवा और मऊगंज जिले में यह नीति अव्यवस्था, मनमानी और माफिया नियंत्रण की कहानी बनकर रह गई है। इन जिलों में शराब का कारोबार केवल व्यापार नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता, सिस्टम और संगठित अपराध का नया चेहरा बन चुका है।
MRP से अधिक वसूली – उपभोक्ताओं की जेब पर खुली लूट
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकांश शराब दुकानों पर ग्राहकों से निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि 20 रुपये से लेकर 100 रुपये तक की अवैध वसूली आम हो चुकी है।
ग्राहकों का कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें धमकाया जाता है या अनदेखा कर दिया जाता है। दुकानदारों की मनमानी इस हद तक बढ़ चुकी है कि रसीद मांगने पर भी टाल-मटोल की जाती है।
यह अवैध वसूली किसके लिए?
स्थानीय चर्चा में यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि यह अतिरिक्त राशि किसकी जेब में जा रही है? क्या यह वसूली केवल दुकान संचालकों और सेल्समैन तक सीमित है, या फिर इसका हिस्सा उच्चाधिकारियों और राजनीतिक संरक्षकों तक भी पहुँचता है? प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी इन सवालों को और गहरा बनाती है।
शराब माफियाओं की दबंगई: सत्ता और धन का गठजोड़
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, रीवा और मऊगंज जिले में अधिकांश शराब ठेके कुछ गिने-चुने गुटों के नियंत्रण में हैं। यह वही लोग हैं जो कुछ वर्ष पहले तक आर्थिक रूप से औसत स्थिति में थे, लेकिन अब उनके पास आलीशान बंगले, लक्ज़री गाड़ियाँ और कथित अरबों की संपत्ति है।
इन कारोबारियों के पीछे राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक समर्थन के आरोप लग रहे हैं। ख़बर यह भी है कि परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के परिवारजनों के नाम पर दर्जनों शराब ठेके संचालित हो रहे हैं। यह सीधे-सीधे शासन-सिस्टम और व्यापार के अस्वस्थ गठबंधन की ओर संकेत करता है।
प्रशासनिक बदलाव नाकाम – अपराध और मजबूत
हाल ही में मऊगंज और रीवा जिले में कुछ प्रशासनिक फेरबदल किए गए थे, जिससे जनता को उम्मीद थी कि शराब कारोबार में चल रही अव्यवस्थाओं पर लगाम लगेगी। लेकिन नतीजे इसके विपरीत सामने आए। माफिया पहले से अधिक संगठित हो गए हैं, और पुलिस तथा आबकारी विभाग की निष्क्रियता ने आमजन में गहरी नाराजगी भर दी है।
जनता में आक्रोश, लेकिन सवालों के जवाब नहीं
आमजन अब सवाल पूछ रही है:
MRP से अधिक वसूली की अनुमति किसने दी?
दुकानों की निगरानी का दावा करने वाला आबकारी विभाग क्या कर रहा है?
प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि क्यों मौन हैं?
इन सवालों के उत्तर नदारद हैं। प्रशासनिक चुप्पी और राजनीतिक संरक्षण की गूंज हर गली, चौराहे और सोशल मीडिया मंचों पर साफ सुनाई दे रही है।
माँग: निष्पक्ष जांच और सख्त कार्यवाही की आवश्यकता
विंध्य वसुंधरा समाचार यह स्पष्ट करता है कि वायरल वीडियो की प्रमाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि हमारे स्तर पर नहीं की गई है। यदि ये वीडियो सत्य साबित होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। यदि ये भ्रामक हैं, तो इन्हें प्रसारित करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई जरूरी है।
जनता की मांगें स्पष्ट हैं:
1. सभी शराब दुकानों की नियमित, औचक और निष्पक्ष जांच की जाए।
2. अवैध वसूली की रकम का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए।
3. माफियाओं और उनके संरक्षणदाताओं के खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं।
4. जनता की शिकायतों के लिए एक स्वतंत्र और पारदर्शी शिकायत तंत्र बनाया जाए।
नशा मुक्त भारत का सपना या माफिया मुक्त शासन की ज़रूरत?
यदि प्रशासन ने समय रहते स्थिति नहीं संभाली, तो यह संकट सिर्फ रीवा और मऊगंज तक सीमित नहीं रहेगा – यह पूरे प्रदेश में फैल सकता है। "नशा मुक्त भारत" और "विकासशील समाज" की कल्पना केवल नारों से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से ही साकार हो सकती है।
अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन अपनी भूमिका का निर्वहन करे, अन्यथा जनता का विश्वास टूटने में देर नहीं लगेगी।


