रीवा में नल-जल योजना में 311 करोड़ का घोटाला, फर्जी बैंक गारंटी से हड़पे अरबों के ठेके
मध्यप्रदेश जल निगम और बैंकों की मिलीभगत से किया गया घोटाला, सामाजिक कार्यकर्ता ने ईओडब्ल्यू में की शिकायत, उच्च स्तरीय जांच की मांग
प्रदेश की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना भ्रष्टाचार के गर्त में समाती नजर आ रही है। रीवा जिले से शुरू होकर राजधानी भोपाल तक फैले इस घोटाले में अब तक 311 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी के जरिए ठेके हासिल करने का बड़ा खुलासा हुआ है। इस गड़बड़ी को उजागर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता बी.के. माला ने आरोप लगाया है कि यह घोटाला मप्र जल निगम और कुछ निजी बैंकों की आपसी सांठगांठ से अंजाम दिया गया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगी है।
फर्जी दस्तावेजों से ठेके, नहीं हुई वैधता की जांच
बी.के. माला के अनुसार, जल निगम, मध्य प्रदेश द्वारा जल आपूर्ति कार्यों के लिए जिन कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उन्होंने कार्यादेश प्राप्त करने से पहले फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत की। तीरथ गोपीकॉन लिमिटेड, एमपी बावरिया लिमिटेड और अंकित कंस्ट्रक्शन नामक कंपनियों ने परियोजना लागत की 10 फीसदी राशि के एवज में परफॉर्मेंस गारंटी और मोबिलाइजेशन एडवांस के लिए जाली बैंक दस्तावेज प्रस्तुत किए।
इन कंपनियों को जल आपूर्ति योजनाओं के लिए दो वर्ष पहले ठेका मिला था। सामान्य प्रक्रिया के तहत किसी भी बैंक गारंटी का सत्यापन संबंधित विभाग द्वारा किया जाना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में जानबूझकर सत्यापन नहीं कराया गया। माला का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने या तो अनदेखी की या फिर निजी लाभ के चलते इस फर्जीवाड़े को संरक्षण दिया।
भोपाल की बैंक शाखा भी शक के घेरे में
सामाजिक कार्यकर्ता के अनुसार, यह घोटाला केवल कंपनियों तक सीमित नहीं है। भोपाल स्थित एक प्रमुख बैंक शाखा की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। वहीं मप्र जल निगम के अधिकारियों पर भी यह आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर इन कंपनियों से करार किया और बिना वैध गारंटी के करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट दे दिए।
व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार का आरोप
माला का कहना है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश भर में चल रहे अन्य विभागीय प्रोजेक्ट्स जैसे पीएचई, पीडब्ल्यूडी, आबकारी विभाग आदि में भी इस तरह के भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि केवल इस मामले की नहीं, बल्कि सभी विभागों के प्रोजेक्ट्स की भी उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि जनता के पैसों की लूट को रोका जा सके।
ईओडब्ल्यू में शिकायत, कार्रवाई की मांग
बी.के. माला ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में विस्तृत शिकायत दर्ज कराते हुए यह मांग की है कि इस मामले में शामिल कंपनियों, बैंक अधिकारियों और जल निगम से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।
बी.के. माला, सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा
"यह घोटाला केवल धन की लूट नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता के अधिकारों पर डाका है। 311 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी से प्रोजेक्ट हथियाए गए। हमने ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई है और मांग करते हैं कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जेल भेजा जाए। जब तक इस तरह के घोटालों पर लगाम नहीं लगेगी, आम आदमी तक पानी, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंचेंगी।"






