सत्यराज गोस्वामी के निवास ग्राम लोरी में शिव महापुराण कथा का आठवां दिवस भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न
१०८ जगत गिरि जी महाराज के सान्निध्य में महन्त कमल गिरि गोस्वामी जी महाराज ने कराया भगवान गणेश जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन
गणपति जी को अर्पित किए गए लड्डू, श्रद्धालु झूमे भक्ति रस में
रीवा, ग्राम लोरी। ग्राम लोरी स्थित सत्यराज गोस्वामी के निवास पर चल रही 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा का आठवां दिवस मंगलवार को भक्ति, श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर १०८ जगत गिरि जी महाराज के सान्निध्य में इंदौर से पधारे महन्त कमल गिरि गोस्वामी जी महाराज ने भगवान गणेश के जन्मोत्सव प्रसंग का मनोहारी वर्णन किया।
भगवान गणेश के जन्म की कथा से गुंजा वातावरण
महन्त कमल गिरि जी महाराज ने माता पार्वती द्वारा उबटन से गणेश जी की उत्पत्ति, उनके द्वारा शिव के द्वार पर पहरा देने और शिव द्वारा अनजाने में उनका मस्तक काटे जाने की कथा का ऐसा वर्णन किया कि उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो उठा। जब कथा में बताया गया कि किस प्रकार शिव ने हाथी का मस्तक जोड़कर गणेश को जीवनदान दिया और उन्हें प्रथम पूज्य बनाया, तो श्रद्धालु जयघोष करने लगे – "गणपति बप्पा मोरया!"
लड्डू अर्पण और प्रसाद वितरण
गणेश जन्मोत्सव के अवसर पर लड्डू का विशेष भोग अर्पित किया गया, जिसे बाद में भक्तों में प्रसाद रूप में वितरित किया गया। भक्तों ने बड़े श्रद्धाभाव से प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन स्थल पर महिलाओं और बच्चों की विशेष उपस्थिति रही। बच्चों ने गणेश झांकियां सजाईं और रंगोलियां बनाईं, जिससे वातावरण और भी आकर्षक हो गया।
१०८ जगत गिरि जी महाराज का आशीर्वचन
१०८ जगत गिरि जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि शिव महापुराण जीवन में धर्म, संयम और आत्मबोध का संदेश देता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति का स्मरण करना जीवन में सफलता का मार्ग खोलता है।
कथा का आगे का क्रम
कथा आयोजक सत्यराज गोस्वामी ने बताया कि आने वाले दिनों में कथा में शिव-पार्वती विवाह, सती चरित्र और रावण मोक्ष जैसे प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा। समापन दिवस पर रुद्राभिषेक और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति का उत्साह
कथा के आठवें दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु ग्राम लोरी सहित आसपास के गांवों और क्षेत्रों से पहुंचे। आयोजन स्थल को सुसज्जित किया गया था और सम्पूर्ण वातावरण में भक्ति, अनुशासन और समर्पण का भाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला।



