गांव में गूंजीं गोलियां और लाठियां, एक वाहन में लगाई गई आग – गांजा कारोबारियों की गैंगवार का शक
रीवा जिले के मनगवा थाना अंतर्गत पाउपखार गांव में 29 मई की तड़के करीब 3 बजे अचानक गोलियों और लाठियों की आवाज़ से गांव दहशत में आ गया। गांववासियों का कहना है कि एक वाहन को पलट कर उसमें आग लगा दी गई और घटना स्थल पर गोलियों की आवाज भी सुनाई दी।
गर्मी के कारण सुबह जल्दी जागने वाले ग्रामीण जब नदी और पुल की ओर पहुंचे तो देखा कि एक चारपहिया वाहन जल रहा था, जबकि दूसरी गाड़ी मौके पर खड़ी थी। ग्रामीणों ने जब तक पुलिस को सूचना दी, तब तक आग धधकती रही और टायरों के फटने से बम जैसी आवाजें आती रहीं, जिससे पूरे गांव में अफवाह फैल गई कि बम विस्फोट हो रहे हैं।
पुलिस जांच प्रारंभ, गाड़ी के मालिक का अब तक कोई सुराग नहीं
सूचना मिलने पर मनगवा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और जली हुई गाड़ी को जब्त कर जांच शुरू की। समाचार लिखे जाने तक, शाम 6 बजे तक न तो किसी अधिकारी और न ही पुलिस द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि यह वाहन किसका था और इसमें आग किसने लगाई।
गांव में चर्चा – गांजा और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार से जुड़ा मामला
स्थानीय सूत्रों और जनचर्चा के अनुसार यह विवाद गांजा एवं नशीली कफ सिरप व गोलियों के अवैध व्यापार से जुड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि पैसे के लेनदेन में हुए विवाद के कारण यह घटना हुई है। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस दिशा में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
गांववासियों के अनुसार मनगवां थाना क्षेत्र तथा इसके आसपास के कुछ गांवों में इस प्रकार के अवैध कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहे हैं। विशेषकर छत्तीसगढ़-सीधी-रीवा सीमा से होकर यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है। चर्चा यह भी है कि कुछ स्थानीय सफेदपोश और अधिकारियों के संरक्षण में यह गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण पुलिस द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है।
नशे का बढ़ता कारोबार – रीवा बन रहा है सुरक्षित ठिकाना?
स्थानीय लोगों का कहना है कि नशीली दवाओं, गांजा और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों का कारोबार रीवा जिले में लगातार बढ़ रहा है और यह इलाका इन अपराधियों के लिए सुरक्षित माने जाने लगा है। अपराधियों के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, जिससे इनके बीच अक्सर वर्चस्व की लड़ाई होती रहती है और इसका परिणाम आम जनता को भुगतना पड़ता है।
प्रशासनिक मौन और सतही कार्यवाही पर सवाल
प्रशासन और पुलिस की कार्यवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं। अक्सर यह देखा गया है कि बड़े-बड़े अभियानों की रिपोर्टिंग में शराब की कुछ बोतलों या गांजे की थोड़ी मात्रा की जब्ती दिखा दी जाती है, जबकि इन अवैध पदार्थों की आपूर्ति की असल जड़ों तक पहुंचने का प्रयास नहीं किया जाता। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि ये नशीले पदार्थ किस विक्रेता, मेडिकल स्टोर या सप्लायर से आ रहे हैं।


