रीवा की 'मौत की घाटी' में फिर बही लहू की धारा: सोहागी पहाड़ पर सीमेंट सीट से लदे ट्रक के नीचे श्रद्धालुओं से भरा ऑटो दबा , एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत, 3 मासूम जिंदगी से जूझ रहे
रीवा, 5 जून 2025 – जब कोई आम परिवार गंगा मैया की गोद में श्रद्धा से डुबकी लगाकर पुण्य कमाने निकले, तो क्या उन्हें यह अंदेशा होता है कि लौटते वक्त उनका ऑटो सीमेंट सीट से लदा ट्रक निगल जाएगा? शायद नहीं। लेकिन मध्यप्रदेश के रीवा जिले की कुख्यात 'सोहागी घाटी' पर यह त्रासदी एक बार फिर घट गई — और इस बार इतनी दर्दनाक कि रीवा की सड़कें, शासन की लापरवाही और प्रशासन की संवेदनहीनता पर पूरे प्रदेश को शर्म आनी चाहिए।
हादसा नहीं, यह व्यवस्थाओं की हत्या है
नेशनल हाईवे 30, जो रीवा को प्रयागराज से जोड़ता है, उस पर स्थित सोहागी पहाड़ वर्षों से 'मौत की घाटी' के नाम से बदनाम है। और अफसोस कि यह बदनामी सरकार की नाक के नीचे लगातार पनप रही है। आज दोपहर, सीमेंट की मोटी चादरों से लदा एक ट्रक घाटी में मोड़ पर अनियंत्रित होकर पलट गया। उसी वक्त गंगा स्नान कर लौट रहा श्रद्धालुओं से भरा एक ऑटो सामने से आ रहा था। ट्रक ने सीधे ऑटो को अपने नीचे रौंद दिया। नतीजा — सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें तीन मासूम बच्चे भी शामिल हैं। तीन अन्य छोटे बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका जीवन फिलहाल वेंटिलेटर के भरोसे झूल रहा है।
केवल एक परिवार नहीं टूटा, बल्कि टूट गया आमजन का भरोसा
मृतकों की सूची पढ़कर कांप उठेगा दिल:
रामजीत जायसवाल (38), उनकी पत्नी पिंकी (35), बेटी अंबिका (9)
बुजुर्ग हीरालाल जायसवाल (65)
वरुण जायसवाल के मासूम बेटे-बेटी: अरविंद (5), मानवी (7)
प्रवीण जायसवाल का 11 वर्षीय बेटा सौरभ
गंभीर घायल:
रविता (30) — वरुण जायसवाल की पत्नी
प्रियांशु (6), अदिति (5) — रामजीत जायसवाल के छोटे बच्चे
क्या मुख्यमंत्री जी इस सूची को देख सकेंगे? क्या वे कल्पना कर सकते हैं कि जब एक मां अपने तीन बच्चों को खो चुकी है और खुद अस्पताल के बेड पर पड़ी है, तो उस पर क्या बीत रही होगी?
विंध्य वसुंधरा समाचार ने पहले ही चेताया था — लेकिन अफसरशाही सोती रही, नतीजा सामने है
यह पहली बार नहीं है जब विंध्य वसुंधरा समाचार ने नेशनल हाईवे-30 एवं 35 की खस्ताहाल हालत, सोहागी घाट की घातक संरचना, और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सरकार और जनता को आगाह किया हो।
हमने कई बार प्रकाशित समाचारों में यह स्पष्ट किया कि कैसे:
मोड़ों पर सुरक्षा संकेतक नदारद हैं
ओवरलोड वाहनों की निगरानी नहीं हो रही
हाईवे किनारे की अधूरी पटरियां जानलेवा बन चुकी हैं
यातायात व्यवस्था सिर्फ कागजों पर है
लेकिन दुखद है कि हमारी पत्रकारिता को गंभीरता से नहीं लिया गया। आज वही लापरवाही सात मासूम जिंदगियों को लील गई। यह न केवल व्यवस्था की विफलता है, बल्कि पूर्व चेतावनियों की अनदेखी का खामियाजा है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया: संवेदना और मुआवज़े की घोषणा
रीवा कलेक्टर कार्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन एवं पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने ईश्वर से मृतकों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है।
सिस्टम की नींव में दरारें: अब सवाल नहीं, जवाब चाहिए
पुलिस कहती है कि "जांच चल रही है", अधिकारी कहते हैं "घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है", लेकिन जनता पूछती है — क्या यह काफी है?
हाईवे के किनारे अधूरी पटरियां क्यों हैं?
मोड़ों पर सिग्नल और चेतावनी बोर्ड कहां हैं?
ट्रकों की ओवरलोडिंग पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
क्षमता से दोगुनी सवारियों से भरे ऑटो पर थानों की नजर क्यों नहीं जाती?
यही NH-30 और NH-35 विंध्य क्षेत्र की धमनियां हैं, लेकिन इन धमनियों में अब खून बह रहा है।
मुख्यमंत्री जी, ये सिर्फ हादसा नहीं — आपकी सरकार की नाकामी है
पिछले एक साल में केवल इस सोहागी घाटी पर दर्जनों हादसे हुए हैं — और विंध्य वसुंधरा समाचार ने हर बार इन्हें प्रमुखता से प्रकाशित किया। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी ‘औपचारिक दुख’ क्या ‘जांच के आदेश’ से आगे कुछ आगे बढ़ पाएगा । सवाल यह है
अब भी नहीं चेते तो तैयार रहिए — अगली मौत आपके दरवाजे पर हो सकती है
यह समाचार सिर्फ रिपोर्ट नहीं, रीवा और पूरे मध्यप्रदेश के प्रशासन को आईना दिखाने की कोशिश है। जनता अब सवाल नहीं पूछेगी — जवाब मांगेगी।
विनती नहीं चेतावनी है — तुरंत उठाए जाएं ये कदम:
NH-30 और NH-35 को आपात स्तर पर दुरुस्त किया जाए
ओवरलोड वाहनों पर तत्काल कार्रवाई हो
ऑटो, ट्रक व यात्री वाहनों की सख्त चेकिंग हो
पुलिस, परिवहन और NHAI की जवाबदेही तय हो
सोहागी घाटी को ‘हाई रिस्क ज़ोन’ घोषित कर विशेष निगरानी में लाया जाए




