सीमेंट और डीजल चोरी की बड़ी वारदात में ट्रक चालक फरार: ट्रांसपोर्टर FIR के लिए दो दिन से थानों के चक्कर काट रहा, पुलिस सीमा विवाद में उलझी
मध्य प्रदेश के सतना से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के लिए भेजा गया सीमेंट से लदा ट्रक अचानक रास्ते से लापता हो गया। ट्रांसपोर्टर को इस बात की जानकारी तब लगी जब आजमगढ़ के दुकानदार ने 3 अप्रैल की सुबह माल न पहुँचने की सूचना दी। इस घटना के बाद ट्रक की खोजबीन शुरू हुई और 4 अप्रैल को गढ़ थाना क्षेत्र के उत्तर द्विवेदी ढाबा के समीप संदिग्ध स्थिति में गाड़ी खड़ी मिली।
जब ट्रक (क्रमांक एमपी 19 एचए 5415) की तलाशी ली गई, तो यह सामने आया कि ट्रक से करीब 250 लीटर डीजल और 600 में से लगभग 200 बोरी सीमेंट गायब थी। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह रही कि ट्रक चालक फरार मिला और अब तक उसका कोई पता नहीं चल पाया है।
ट्रांसपोर्टर परेशान, FIR के लिए थानों के चक्कर
इस मामले में ट्रांसपोर्टर राजेन्द्र प्रसाद तिवारी ने 4 जून को थाना गढ़ में घटना की लिखित जानकारी दी थी, लेकिन आज तक FIR दर्ज नहीं की गई। तिवारी का कहना है कि वे दो दिनों से गढ़ थाना और सतना के बीच चक्कर काट रहे हैं। गढ़ थाना कहता है कि यह मामला सतना जिले का है, वहीं सतना पुलिस कहती है कि गाड़ी गढ़ थाना क्षेत्र में मिली है, इसलिए रिपोर्ट वहीं दर्ज होनी चाहिए।
इस तरह की सीमा विवाद की स्थिति में स्पष्ट कानून व्यवस्था है कि जहां घटना का पता चलता है, वहां जीरो FIR दर्ज कर प्रकरण को संबंधित थाना भेजा जाना चाहिए। लेकिन विडंबना यह है कि इस स्पष्ट दिशा-निर्देश के बावजूद, पुलिस की संवेदनहीनता और प्रशासनिक लचर रवैया आज भी एक आम नागरिक के लिए न्याय की राह में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
ट्रक ड्राइवर की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना ने ट्रक चालकों की विश्वसनीयता को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक ट्रक ड्राइवर को व्यापारिक दृष्टि से विश्वास की सबसे बड़ी कड़ी माना जाता है क्योंकि लाखों का माल और वाहन उसकी जिम्मेदारी में होते हैं। किंतु जब ऐसा ही कोई चालक ड्राइवर-धोखाधड़ी की घटना को अंजाम दे, तो यह केवल चोरी नहीं, एक गहरा विश्वासघात बन जाता है।
राजेन्द्र तिवारी ने कहा कि "हम मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं। पुलिस से न्याय की उम्मीद थी, लेकिन अब वही व्यवस्था हमें भटका रही है। जब एक साधारण नागरिक की लाखों की संपत्ति लुट जाए और वह थाने में दो दिन चक्कर लगाकर भी रिपोर्ट न लिखवा पाए, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है?"
पुलिस की जिम्मेदारी तय हो, सीमा विवाद न बने बहाना
यह घटना केवल एक चोरी नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की लापरवाही और नागरिक अधिकारों की उपेक्षा का जीवंत उदाहरण है। यदि पुलिस यह मानती है कि घटना झूठी है, तो उसे कानून के तहत झूठी रिपोर्ट का प्रकरण दर्ज करना चाहिए। और यदि घटना सही है, तो तत्काल ट्रक चालक के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।
यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही की गंभीर कमी है। थानों के बीच का सीमा विवाद अपराधियों के लिए एक ढाल बनता जा रहा है, जबकि पीड़ित आम नागरिक के लिए यह एक मानसिक उत्पीड़न की स्थिति पैदा करता है।
वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की अपेक्षा
अब यह आवश्यक हो गया है कि रीवा संभाग और राज्य स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले का संज्ञान लें और स्पष्ट निर्देश दें कि जहां भी वाहन, चोरी या दुर्घटना से जुड़ी घटनाएं होती हैं, वहां त्वरित जीरो FIR दर्ज की जाए और संबंधित थाना को बिना देरी सौंप दी जाए।



