"खाद घोटाले की जांच पर दबाव का साया: पुलिस अधिकारी पर सील तोड़वाने के प्रयास का आरोप, जिला कलेक्टर की मुहिम को कमजोर करने की साजिश?"
✍🏻 विंध्य वसुंधरा समाचार, रीवा/मऊगंज मध्यप्रदेश
रीवा-मऊगंज जिले में नकली व मिलावटी खाद के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अभियान को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जहां एक ओर जिला कलेक्टर दृढ़ संकल्प के साथ खाद माफियाओं पर शिकंजा कसने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर इसी मुहिम को पाटिल लगाने की कोशिशें भी सामने आने लगी हैं।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में सील की गई एक खाद दुकान को लेकर पुलिस विभाग के एक अधिकारी द्वारा "रात में ही दुकान खोलने" का मौखिक दबाव संबंधित विभागों पर बनाया गया है। यह परिस्थिति प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नियमों पर सीधा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
सील प्रक्रिया बनी सवालों के घेरे में
सूत्रों की मानें तो संबंधित दुकान को एक नियमित और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत सील किया गया था। इस कार्रवाई में कृषि, राजस्व व पुलिस विभाग की संयुक्त उपस्थिति रही थी। नियमानुसार सील तोड़ने की कोई भी कार्रवाई तभी संभव है जब –
दुकान संचालक की उपस्थिति हो,
स्टॉक बुक (अष्टक रजिस्टर) का मिलान किया जाए,
संबंधित विभागों की मौजूदगी में भौतिक सत्यापन किया जाए।
लेकिन अब जिस तरह से 'रात में ही जांच कर सील हटाने' का दबाव बताया जा रहा है, उससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
गढ़ थाने का सीसीटीवी कैमरा अगर देखा जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है किन किन अधिकारी रात में सील प्रक्रिया हटने गढ़ क्षेत्र में आए हुए थे। जिसका प्रमाण गढ़ थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे हैं।
कौन है वह अधिकारी?
जनचर्चा का विषय यह भी है कि आखिर वह कौन पुलिस अधिकारी है जो नियमों से हटकर इस प्रकार की पहल कर रहा है? कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस प्रकार के दबाव से प्रशासन की सख्त कार्रवाई को पथभ्रष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। यह पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सेल की औपचारिकता कर खाद माफियाओं को राहत देने की तैयारी का संकेत देता है।
खाद आपूर्ति पर भी उठे सवाल
सिर्फ जांच नहीं, खाद वितरण की पूरी श्रृंखला की भी जांच जरूरी है। वर्ष 2025 की खरीफ फसल हेतु शासन और निजी दुकानों को किस कंपनी की कितनी मात्रा में खाद आवंटित और वितरित की गई — इस पर भी विस्तृत जांच की आवश्यकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस स्तर पर गड़बड़ी की गई।
कलेक्टर की कार्रवाई को कमजोर करने की कोशिश
दावा किया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों द्वारा जिला कलेक्टर की ईमानदार और कठोर मुहिम को भ्रमित किया जा रहा है। खाद माफिया को लाभ पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से अभियान पर पानी फेरने की कोशिशें हो रही हैं। यह न सिर्फ प्रशासन की साख को ठेस पहुंचाता है, बल्कि किसानों के साथ खुला अन्याय भी है।
संभागीय आयुक्त की निगरानी जरूरी
इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संभागीय आयुक्त को चाहिए कि वे स्वयं इस मामले की निगरानी करें। सील की गई दुकानों, आपूर्ति व्यवस्था और कथित दबाव की निष्पक्ष जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर नियमों से समझौता न हो।
रीवा जिले में खाद माफिया पर कार्रवाई की मुहिम, केवल कागज़ों में नहीं बल्कि धरातल पर नजर आए — यह जनता की अपेक्षा है। यदि ऐसे अभियान को आंतरिक दबावों के कारण रोकने या भटकाने की कोशिश की जाती है, तो यह न केवल शासन की साख के लिए खतरा है, बल्कि किसानों के अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है। जिला प्रशासन को चाहिए कि वह हर स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखे और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करे।
