बीज और कीटनाशकों दुकानों में खुली लूट: रीवा-मऊगंज के अन्नदाता की बर्बादी पर मौन क्यों है कृषि विभाग?"
विशेष पड़ताल | विंध्य वसुंधरा समाचार | रीवा-मऊगंज मध्यप्रदेश | 18 जून 2025
देश का अन्नदाता आज खेत में नहीं, खेत के बाज़ार में लूटा जा रहा है — वह भी उन्हीं लोगों के हाथों, जिन पर उसकी कृषि समृद्धि की जिम्मेदारी है। रीवा और मऊगंज जिले के गांवों में बीज एवं कीटनाशक दवाओं के नाम पर जो ठगी चल रही है, वह केवल उपेक्षा नहीं, एक योजनाबद्ध ‘सिस्टमेटिक शोषण’ है — और इस शोषण की सबसे बड़ी जिम्मेदार संस्था बन चुकी है कृषि विभाग खुद।
हर गांव में खुले हैं 'नकली उम्मीदों' के केंद्र — लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे हैं
रीवा और मऊगंज के हर ब्लॉक, हर गांव, हर कस्बे में दर्जनों बीज एवं कीटनाशक दुकानों की बाढ़ आ गई है। लेकिन इनकी संख्या से कहीं ज्यादा भयावह है इनका गुणवत्ता नियंत्रण से मुक्त व्यापार।
किसान जब बीज लेने दुकान जाता है तो न रेटलिस्ट मिलती है, न बिल, न कोई गारंटी। बीज किस कंपनी का है, कौन डीलर है, कहां से मंगाया गया — इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता। दुकानदार सिर्फ एक बात कहते हैं — “सेटिंग है मेरी, जो करना हो कर लो।”
क्या यह वाक्य जिले के प्रशासनिक ढांचे पर एक तमाचा नहीं है?
‘कुशवाहा बीज भंडार’ गढ़ — एक केस स्टडी या लूट का नमूना?
नईगढ़ी मार्ग स्थित ‘कुशवाहा बीज भंडार’ की संपत्ति में हुई बेतहाशा वृद्धि सिर्फ व्यवसाय की सफलता नहीं, सिस्टम की असफलता का प्रतीक बन चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि दुकान से न बीज का रसीद दिया जाता है, न बिल, न दवाओं पर एक्सपायरी सही होती है। दुकानदार खुलेआम कहते हैं, “हमारे ऊपर बड़े अधिकारियों की छाया है।”
अगर एक दुकानदार करोड़ों का व्यापार कर रहा है, तो कृषि विभाग को यह बताना चाहिए कि:
उसने कितनी मात्रा में बीज बेचे?
कितना टैक्स जमा किया गया?
कितने किसानों को किस बीज पर क्या गारंटी दी गई?
इन सवालों का उत्तर यदि कृषि विभाग के पास नहीं है, तो यह केवल लापरवाही नहीं, आपराधिक चुप्पी है।
नाबालिको से कीटनाशक की बिक्री — कानून की सरेआम अवहेलना
कई दुकानों पर महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे कीटनाशक दवाएं बेचते देखे गए। यह जहरीले रसायन बिना किसी सुरक्षा, बिना प्रशिक्षण, और बिना किसी वैध लाइसेंस के बेचे जा रहे हैं। इससे सिर्फ कानून नहीं टूटा, बल्कि मानव जीवन को खतरे में डाला गया है।
क्या जिला प्रशासन इस ओर ध्यान देगा जब कोई बच्चा अस्पताल में भर्ती होगा या जब कोई किसान फसल में छिड़काव से जहर खा लेगा?
कृषि विभाग की ‘कुंभकर्णी’ नींद — वर्षों से एक ही जगह जमे अधिकारी
रीवा और मऊगंज जिले में कृषि विभाग के अधिकारी ‘दादा पद’ पर वर्षों से टिके हुए हैं।
क्या विभाग में योग्य अधिकारियों की कमी है?
या फिर यह पदस्थापन ‘विशेष लाभ’ से जुड़ा हुआ है?
क्या इन अधिकारियों ने स्थानीय व्यापारियों से ऐसी सेटिंग कर रखी है जो निरीक्षण, कार्रवाई और जवाबदेही को समाप्त कर चुकी है?
यदि एक दिन की गुप्त जांच हो तो शायद किसानों के हक की कितनी लूट छिपी है, इसका अंदाजा पूरे विंध्य को लग जाएगा।
यह सिर्फ भ्रष्ट व्यापारियों का सवाल नहीं है। यह सवाल है कि क्या हम उस व्यक्ति को — जो खेतों में पसीना बहाकर देश का पेट भरता है — ऐसे ही ठगों के हवाले छोड़ देंगे?
यदि अब भी कृषि विभाग और प्रशासन चुप है, तो समझा जाएगा कि वे भी इस लूट में भागीदार हैं।
अब कार्रवाई नहीं हुई, तो कल जिम्मेदारी तय होगी — और जनता जवाब मांगेगी।
विंध्य वसुंधरा समाचार इन बातों की पुष्टि नहीं करता है जांचर्चा एवं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह समाचार तैयार की गई सत्यता क्या है कठोर जाँच कार्यवाही के बाद ही सामने आएगी




