फर्जी अनुकंपा नियुक्तियों पर प्रशासन का सर्जिकल स्ट्राइक — कमिश्नर ने जिला शिक्षा अधिकारी व योजना अधिकारी को किया निलंबित
एडवोकेट वी.के. माला की शिकायत से खुला बड़ा घोटाला, 5 नियुक्तियां निकलीं फर्जी, जवाबदेही से बच नहीं पाए शीर्ष अधिकारी
| विशेष रिपोर्ट विंध्य वसुंधरा समाचार
शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्तियों के नाम पर जारी फर्जीवाड़े पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद ने जिला शिक्षा अधिकारी सुदामा लाल गुप्ता और योजना अधिकारी (प्रभारी प्राचार्य, हाईस्कूल) अखिलेश मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अधिवक्ता वी.के. माला द्वारा प्रस्तुत विधिक आवेदन पर हुई उच्च स्तरीय जांच के बाद की गई है, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया में कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अनियमित नियुक्तियां देने का खुलासा हुआ।
जांच में खुला खेल — 5 अनुकंपा नियुक्तियां मिलीं फर्जी
कमिश्नर कार्यालय द्वारा जारी आदेश क्रमांक 116/तीन/स्था./1/2025 के अनुसार, वर्ष 2024-25 की अवधि में कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी रीवा द्वारा की गई 37 अनुकंपा नियुक्तियों की जांच में 5 प्रकरणों में दस्तावेज पूर्णतः फर्जी पाए गए।
इनमें मृत्यु प्रमाण पत्रों की जालसाजी, ऑनलाइन सत्यापन में गड़बड़ी, और दस्तावेजों की जानबूझकर अनदेखी जैसे गंभीर तथ्य सामने आए। कलेक्टर रीवा द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर दोनों अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए कमिश्नर ने कड़ा निर्णय लिया।
एडवोकेट वी.के. माला की जनहित याचिका बनी कार्रवाई की नींव
इस पूरे प्रकरण की नींव बनी अधिवक्ता वी.के. माला की शिकायत, जिसमें उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रीवा और अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों की साजिश रचकर अनुकंपा नियुक्तियां देने का आरोप लगाया था।
कमिश्नर कार्यालय को भेजे गए इस आवेदन में मृत कर्मचारियों के परिवारों के साथ हुए अन्याय और फर्जी लाभार्थियों को मिली नियुक्तियों की सटीक जानकारी सहित प्रमाण प्रस्तुत किए गए थे। इससे प्रशासन को उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके परिणामस्वरूप यह बड़ी कार्रवाई सामने आई।
जवाब देने में विफल रहे अधिकारी, प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए
नियमानुसार दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। लेकिन उत्तर असंतोषजनक पाए जाने पर, कमिश्नर ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के अंतर्गत उन्हें कर्तव्यपालन में लापरवाही, नियमों की अवहेलना और सेवा आचरण उल्लंघन का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया।
मुख्यालय बदला, सेवा समाप्ति की संभावनाएं प्रबल
निलंबन की अवधि में दोनों अधिकारियों को संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण कार्यालय, रीवा में उपस्थित रहना होगा। इस दौरान वे केवल जीवन निर्वाह भत्ता के पात्र होंगे।
सूत्रों के अनुसार, दोष प्रमाणित होने पर सेवा समाप्ति और आपराधिक मामला दर्ज होने की संभावना भी बन रही है। कमिश्नर कार्यालय ने न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए दस्तावेज संबंधित अधिकारी को भेज दिए हैं।
क्या कहते हैं दस्तावेज? — भर्ती प्रक्रिया को बताया ‘सुनियोजित घोटाला’
शिकायत से जुड़े दस्तावेजों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि कुछ पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति जानबूझकर रोकी गई, जबकि अपात्र लोगों को राजनीतिक संरक्षण और घूसखोरी के बल पर नियुक्ति पत्र जारी किए गए।
इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को एक सुनियोजित योजना के तहत अंजाम दिया गया घोटाला बताया गया है, जिसमें शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सीधे तौर पर संलिप्त हैं।
जनता की मांग — दोषियों को मिले कठोर सजा, पात्रों को मिले न्याय
इस मामले में केवल निलंबन को पर्याप्त नहीं माना जा रहा। जनमानस, अभिभावकों, वंचित अभ्यर्थियों और शिक्षकों की ओर से सेवा से बर्खास्तगी, एफआईआर, और पात्र आवेदकों की नियुक्ति की मांग तेज हो गई है।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता वी.के. माला ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस प्रकार की अनुकंपा योजना का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए स्थायी निगरानी तंत्र बनाया जाए।
यह समाचार तीन प्रशासनिक आदेशों, विभागीय जांच प्रतिवेदन और न्यायिक दस्तावेजों के सत्यापन पर आधारित है। विंध्य वसुंधरा समाचार इसकी आगामी न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों पर निरंतर निगरानी रखेगा।




