रीवा-मऊगंज बारूद के ढेर पर — अवैध ईंधन और शराब से जनसुरक्षा पर संकट, जिम्मेदार क्यों खामोश?
🖋 विशेष रिपोर्ट | विंध्य वसुंधरा समाचार | रीवा-मऊगंज, मध्यप्रदेश
रीवा और मऊगंज जिले आज एक ऐसे खतरे के साए में जी रहे हैं जो सिर्फ कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक विस्फोट का संकेत है। डीजल-पेट्रोल की मिलावटी बिक्री और गांव-गांव तक फैला अवैध शराब व्यापार जनजीवन को बर्बादी की कगार पर ले आया है। हालात ऐसे हैं कि अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी जनहानि टाली नहीं जा सकेगी।
⚠️ गढ़ क्षेत्र बना अवैध शराब वितरण का अड्डा — प्रशासन क्यों है शांत?
गढ़ थाना क्षेत्र की कंपोजिट शराब दुकानें अब शराब वितरण केंद्र नहीं, बल्कि अवैध 'पाइकारी डिलीवरी नेटवर्क' में बदल चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक, सीराईया के पवन सिंह और उसके सहयोगी विवेक सिंह सिगटी गांव-गांव शराब पहुंचा रहे हैं। यह पूरा नेटवर्क गढ़ शराब दुकान की छतरी के नीचे फल-फूल रहा है।
जब गांवों में इन नामों की खुलेआम चर्चा हो रही है, तब सवाल उठता है — आबकारी विभाग किस दबाव या सुविधा में मौन बैठा है? क्या शासन की अनुमति से "नजराना संस्कृति" का पोषण हो रहा है?
🛢️ डीजल-पेट्रोल की खुलेआम अवैध बिक्री — जहरीले ईंधन से दोहरी मार
गढ़ क्षेत्र में खुलेआम प्लास्टिक की बोतलों में मिलावटी डीजल-पेट्रोल की बिक्री हो रही है। इन ईंधनों में मिलाए गए सस्ते केमिकल्स गाड़ियों के इंजन बर्बाद कर रहे हैं और आगजनी का खतरा बढ़ा रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत करने पर दुकानदारों का बेहिचक जवाब होता है — “जहां जाना है, जाओ... कुछ नहीं होगा।” यह जवाब न केवल कानून की खिल्ली है, बल्कि शासन की असफलता की भी सार्वजनिक घोषणा है।
🧯 जिला कलेक्टर के आदेश हवा में — क्या सिर्फ कागज़ों पर चलता है प्रशासन?
रीवा कलेक्टर द्वारा समय-समय पर दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद गढ़ क्षेत्र में अवैध भंडारण और बिक्री बदस्तूर जारी है। न कोई एफआईआर, न जब्ती, न ही निगरानी — इससे साफ होता है कि आदेश सिर्फ नोटशीट और प्रेस नोट तक सीमित हैं, ज़मीनी कार्रवाई शून्य है।
📢 जनता की दो टूक मांग — अब सिर्फ भाषण नहीं, नतीजे चाहिए
जनता की स्पष्ट मांगें:
पवन सिंह व विवेक सिंह सिगटी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम व IPC के तहत केस दर्ज हों।
पेट्रोल-डीजल मिलावट कर्ताओं पर FSSAI, Explosives Act और Legal Metrology कानूनों के तहत कार्यवाही हो।
❗यदि 72 घंटे में कार्रवाई नहीं होती, तो जनमत यह मानने को स्वतंत्र होगा कि यह कारोबार सत्ता व प्रशासनिक संरक्षण में फल-फूल रहा है।
प्रश्न वही है
क्या हमें 'गढ़ कांड' जैसी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार करना चाहिए?
या प्रशासन अब जागेगा और अपने दायित्व निभाएगा?
📝 नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय नागरिकों, प्रत्यक्षदर्शियों और विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। विंध्य वसुंधरा समाचार इसकी अंतिम सत्यता की पुष्टि नहीं करता। यह लेख जनहित में प्रकाशित किया गया है, ताकि शासन-प्रशासन समय रहते चेत जाए और जनसुरक्षा को सर्वोपरि रखे।



