लोकल यूथ सर्वेयर्स ने कलेक्टर को सौंपा मांगपत्र – नियमित रोजगार, मानदेय और भुगतान की मांग उठाई डिजिटल फ्रंट सर्वे में नियुक्त युवाओं की समस्याएं गहराई, खरीफ-रबी सीजन का भुगतान अब तक लंबित
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मध्यप्रदेश
जिले में डिजिटल इंडिया मिशन और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कार्यरत लोकल यूथ सर्वेयर्स की परेशानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सीमित संसाधनों और विषम परिस्थितियों के बावजूद ईमानदारी से काम कर रहे इन युवाओं को अब तक उनके कार्य का समुचित पारिश्रमिक नहीं मिल सका है। इसी के चलते सोमवार को रीवा जिले के लोकल यूथ सर्वेयर्स का प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और एक विस्तृत मांगपत्र सौंपा।
मांगपत्र में युवाओं ने 2024 की खरीफ और 2025 की रबी फसलों के लिए किए गए डिजिटल फ्रंट सर्वे और फार्मर आईडी कार्ड के कार्यों के भुगतान की मांग की है। साथ ही भविष्य में इन कार्यों के लिए नियमित रोजगार देने, मानदेय निर्धारित करने, और उन्हें शासन द्वारा अधिकारिक पहचान दिलाने की भी बात उठाई गई है।
कड़ी मेहनत, फिर भी अनिश्चित भविष्य
ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया कि जुलाई 2024 में शासन के आदेशानुसार उन्हें डिजिटल फ्रंट सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए नियुक्त किया गया था। एमपी एग्रीकल्चर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन नियुक्त हुए इन युवाओं ने ग्राम स्तर पर खरीफ एवं रबी की फसल गिरदावरी, किसान पंजीयन, फार्मर आईडी कार्ड से जुड़ी जानकारियों का डिजिटलीकरण जैसे जिम्मेदार कार्य पूरी निष्ठा से किए हैं।
इसके बावजूद शासन द्वारा अब तक उनका पारिश्रमिक भुगतान नहीं किया गया है, न ही फार्मर आईडी कार्ड से जुड़े कार्यों की प्रक्रिया को पूरा किया गया है। सर्वेयर्स का कहना है कि वे प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक फील्ड में कार्य कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों की आजीविका जुड़ी है। ऐसे में आर्थिक अनिश्चितता के कारण वे मानसिक और सामाजिक संकट में फंसे हुए हैं।
मुख्य मांगे जो रखीं गईं
1. 2024 खरीफ और 2025 रबी सीजन के लिए किए गए फसल सर्वे कार्यों का तत्काल भुगतान किया जाए।
2. फार्मर आईडी कार्ड से जुड़े समस्त कार्यों का मूल्यांकन कर उन्हें शीघ्र भुगतान प्रदान किया जाए।
3. लोकल यूथ सर्वेयर्स को राज्य रोजगार सहायक की तर्ज पर स्थायी रोजगार प्रदान किया जाए।
4. शासन द्वारा अधिकारिक पहचान-पत्र जारी किया जाए ताकि वे कार्यस्थल पर अधिकारपूर्वक कार्य कर सकें।
5. आईडी कार्ड में सीमांकन और वेरीफिकेशन के कार्यों को भी जोड़ा जाए जिससे सर्वे की कार्यप्रणाली व्यापक और सटीक हो।
6. सभी सर्वेयर्स के लिए निश्चित और सम्मानजनक मासिक मानदेय तय किया जाए जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण सुचारु रूप से कर सकें।
7. कार्य के दौरान फील्ड पर सुरक्षा, यात्रा और तकनीकी उपकरणों की सुविधा और प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए।
“काम लिया जा रहा है, पर मान्यता नहीं”
लोकल यूथ सर्वेयर्स ने बताया कि शासन द्वारा बार-बार उन्हें फसल गिरदावरी और अन्य कृषि योजनाओं के लिए फील्ड में लगाया जा रहा है, लेकिन उनके कार्य को न तो स्थायीत्व मिल रहा है और न ही मान्यता। इस दोहरे मापदंड से न केवल युवाओं का मनोबल टूट रहा है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन से तत्काल समाधान की अपेक्षा
ज्ञापन के अंत में युवाओं ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे इस गंभीर विषय को संज्ञान में लेते हुए जल्द ही भुगतान संबंधी आदेश जारी करें। साथ ही, भविष्य के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए ताकि सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगे युवाओं को उचित अधिकार, सम्मान और सुरक्षा मिल सके।
हमने हर परिस्थिति में शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने का कार्य किया है। अब हमारी मांगों को गंभीरता से सुनना और समाधान देना प्रशासन की जिम्मेदारी है।" लोकल यूथ सर्वेयर प्रतिनिधि मंडल




