ड्यूटी के दौरान बिजलीकर्मियों पर जानलेवा हमला — चार गंभीर घायल, कर्मचारियों में आक्रोश की लहर
रीवा जिले के लालगांव विद्युत वितरण केंद्र से जुड़े कर्मचारियों पर कर्तव्य निर्वहन के दौरान हुए हमले ने प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय उदासीनता की पोल खोल दी है। बीते 15-16 जून 2025 की दरम्यानी रात देउर क्षेत्र में बिजली लाइन की पेट्रोलिंग कर रहे कर्मचारियों पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। इस गंभीर घटना में चार कर्मचारी बुरी तरह घायल हुए हैं। सभी को संजय गांधी अस्पताल, रीवा में भर्ती कराया गया है, जहां एक की हालत अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है।
⚡ फाल्ट सुधारने पहुंचे थे कर्मचारी, गांववालों ने बोला हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 15 जून की रात लगभग 8:30 बजे बिजली फाल्ट की सूचना पर बिजली विभाग की टीम बोलेरो वाहन से देउर गांव पहुंची थी। टीम में रमाकांत पटेल, अनिल विश्वकर्मा, कमलेश प्रजापति, प्रमोद कश्यप, रामकरण प्रजापति सहित करीब 10 कर्मचारी शामिल थे। जैसे ही टीम कार्य शुरू करने लगी, तभी ग्राम देउर और त्यौंथर के लगभग दो दर्जन ग्रामीणों — जिनमें लक्ष्मण यादव, सूर्यबली यादव, रामजी यादव, विवेन्द्र यादव और लालता यादव प्रमुख थे — ने यह कहते हुए हमला कर दिया कि “तुम लोग जानबूझकर बिजली काटते हो, गांव को अंधेरे में रखते हो।”
हमलावरों ने न सिर्फ कर्मचारियों को पीटा, बल्कि विभागीय बोलेरो वाहन में भी तोड़फोड़ की। कर्मचारियों को घसीट-घसीट कर मारा गया। इस मारपीट में कमलेश प्रजापति, अनिल विश्वकर्मा, प्रमोद कश्यप सहित चार से अधिक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से एक की हालत चिंताजनक है।
🚨 विभागीय लापरवाही आई सामने, JE ने पहले ही नहीं दी थी सूचना
हमले के तीन दिन पहले ही इस क्षेत्र में बिजली विवाद की स्थिति बनी थी, परंतु कनिष्ठ अभियंता (JE) प्रणव वर्मा द्वारा न तो इसकी सूचना थाने को दी गई और न ही कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम उठाया गया। यह लापरवाही अब विभाग के लिए भारी पड़ती नजर आ रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक कर्मचारी रामकरण प्रजापति को हमलावरों ने कनिष्ठ अभियंता के सामने बेरहमी से पीटा, जिससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
🔎 FIR दर्ज, एई ने संसाधनों की कमी को ठहराया जिम्मेदार
घटना के बाद सहायक अभियंता उमाशंकर द्विवेदी, कनिष्ठ अभियंता प्रणव वर्मा, संजय गुप्ता सहित सैकड़ों बिजलीकर्मी गढ़ थाने पहुंचे। वहां आरोपियों के खिलाफ मामला पंजीबद्ध कराया गया। एई द्विवेदी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि विद्युत सुधार कार्यों में पर्याप्त संसाधन, पर्याप्त कर्मचारी और जरूरी उपकरणों की भारी कमी है। उन्होंने इस ओर ध्यान न देने वाले जिम्मेदार नेताओं की उदासीनता पर भी सवाल खड़े किए।
🧑🔧 कर्मचारियों ने दी चेतावनी — गिरफ्तारी नहीं तो होगा कार्य बहिष्कार
घटना को लेकर बिजली विभाग के कर्मचारियों में जबरदस्त नाराजगी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक कार्य बहिष्कार और आंदोलन करेंगे।
❗ प्रशासन की गंभीर परीक्षा — अब देखना यह होगा...
यह घटना न केवल बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि रीवा प्रशासन और पुलिस की संवेदनशीलता और तत्परता की भी परीक्षा है। ग्रामीण अंचलों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
अब देखना यह होगा कि गढ़ थाना पुलिस इस हमले के दोषियों को कितनी शीघ्रता से गिरफ्तार करती है, और क्या त्यौंथर जैसे संकटग्रस्त क्षेत्रों को शासन-प्रशासन की ओर से पर्याप्त संसाधन मिल पाएंगे या फिर कर्मचारी यूं ही अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे?


