मनगवां फ्लाईओवर बना भ्रष्टाचार की बानगी: पहली बारिश में उखड़ी सड़क की परतें, 14 करोड़ के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, समाजसेवी ने EOW में कराया शिकायत दर्ज
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मध्यप्रदेश
रीवा जिले के मनगवां बाईपास पर 14 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित फ्लाईओवर की सच्चाई पहली ही बारिश में सामने आ गई। सड़क की परतें जगह-जगह से उखड़ चुकी हैं, गड्ढे बन गए हैं और संविदाकार द्वारा मात्र मोरम व गिट्टी डालकर लीपापोती की जा रही है। यह स्थिति न सिर्फ शासन की बड़ी आर्थिक क्षति को दर्शाती है, बल्कि निर्माण में हुए भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भी पोल खोलती है। यह हाल तब है जब इस फ्लाईओवर का लोकार्पण अभी दो माह पूर्व ही, मई 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया गया था।
जनहित के नाम पर हुआ खिलवाड़, निर्माण के समय ही जताई गई थी आशंका
मनगवां क्षेत्र में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात सुगम बनाने के उद्देश्य से इस फ्लाईओवर का निर्माण कराया गया था। यह परियोजना पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के अथक प्रयासों से स्वीकृत हुई थी, जिसे एक जनहित योजना के रूप में प्रचारित किया गया। लेकिन निर्माण के दौरान ही क्षेत्रीय विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति ने सरकार को पत्र लिखकर निर्माण कार्य की धीमी गति और घटिया गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते निरीक्षण और सुधार नहीं हुआ तो यह परियोजना जनसुरक्षा के बजाय जनसंकट बन जाएगी।
पहली ही बारिश में खुला भ्रष्टाचार का चेहरा
विधायक की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया और अब वही आशंका भयावह रूप में सामने आई है। बारिश के शुरुआती दौर में ही फ्लाईओवर की डामर की परतें उखड़ गईं, जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं जो कभी भी जानलेवा हादसों का कारण बन सकते हैं। संविदाकार द्वारा महज खानापूर्ति के लिए इन गड्ढों में मोरम व गिट्टी भर दी जा रही है, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि ठेकेदार, संबंधित विभागीय इंजीनियरों और अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण कार्य में जानबूझकर घटिया सामग्री का उपयोग किया गया।
समाजसेवी की पहल, आर्थिक अपराध शाखा को सौंपा शिकायत पत्र
इस गंभीर मामले को लेकर समाजसेवी एवं अधिवक्ता मानवेंद्र द्विवेदी ने आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) रीवा के पुलिस अधीक्षक श्री अरविंद सिंह को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। शिकायत में उन्होंने फ्लाईओवर निर्माण में हुए भ्रष्टाचार, लोकधन की बर्बादी और आम नागरिकों के जीवन को संकट में डालने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध मामला दर्ज हो
एड. द्विवेदी ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने, विभागीय अधिकारियों पर निलंबन एवं न्यायिक जांच के निर्देश जारी करने तथा निर्माण कार्य में खर्च हुई समस्त राशि की पुनः तकनीकी ऑडिट कराकर आर्थिक क्षति की वसूली की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के भ्रष्टाचार से न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी होती है, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ भी है।
EOW ने जांच का दिया आश्वासन, जनता कर रही कठोर कार्रवाई की मांग
पुलिस अधीक्षक ईओडब्ल्यू श्री अरविंद सिंह ने मामले में प्राथमिक जांच का आश्वासन देते हुए कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों की पहचान कर उन्हें सख्त सजा दी जाए, ताकि आगे से कोई भी ठेकेदार और अधिकारी जनता के पैसों से इस तरह का मजाक न कर सके।
यह मामला महज एक फ्लाईओवर की खराब हालत का नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन में व्याप्त उस ढीलेपन और भ्रष्ट तंत्र का प्रतीक है, जो जनकल्याणकारी योजनाओं को चंद रुपयों की लालच में शर्मनाक बनाता है।
यदि इस मामले में शीघ्र और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह जनता में प्रशासन के प्रति भरोसा खत्म कर देगा और यह संदेश जाएगा कि करोड़ों का भ्रष्टाचार भी केवल "मिट्टी डालने" से ढंक दिया जाता है।
सरकार को चाहिए कि इस प्रकरण को उदाहरण बनाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि जनधन की लूट और जनजीवन से खिलवाड़ करने वाले हर ठेकेदार और अधिकारी को स्पष्ट संदेश जाए — भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



