कटरा विद्युत वितरण केंद्र में नशे की गंध! जे ई चैंबर में कंप्यूटर ऑपरेटर कर रहा था कोरेक्स का सेवन, कार्यालय की गरिमा और शासन की साख दोनों तार-तार
रीवा जिले के कटरा विद्युत वितरण केंद्र से एक बेहद शर्मनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने पूरे विभाग की कार्यशैली, अनुशासन और आंतरिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर रिंकू पटेल, पिता कामता पटेल, निवासी महुअरिया — कार्यालय समय के दौरान JE चैंबर में बैठकर नशीली सिरप (कोरेक्स) का सेवन करता हुआ पकड़ा गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि उसके बैग से कई सील बंद कोरेक्स की बोतलें बरामद हुईं, जो यह साबित करती हैं कि यह कोई आकस्मिक या पहली बार की घटना नहीं थी — बल्कि एक आदतन और निरंतर चल रहा नशाखोरी का घिनौना सिलसिला था।
बताया जा रहा है कि रिंकू पटेल विभाग में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत पदस्थ था, और उसके पिता विद्युत विभाग में लाइनमैन पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि और सरकारी सेवा का यह गौरव, उसके कृत्य को और अधिक शर्मनाक बना देता है। यह घटना केवल व्यक्तिगत नैतिक पतन नहीं है — यह पूरे शासकीय ढांचे की उस लचरता की तस्वीर है, जिसमें न अनुशासन है, न निगरानी, और न ही भय।
कार्यालय नहीं, नशा केन्द्र! सरकारी परिसरों में बढ़ता अपराध, घटता अनुशासन
सरकारी दफ्तरों को जनता के विश्वास और सेवा का प्रतीक माना जाता है। लेकिन यदि यही दफ्तर नशे की दलदल में तब्दील हो जाएं, तो सवाल केवल एक कर्मचारी पर नहीं, पूरे प्रशासनिक तंत्र पर उठते हैं। इस घटना से यह साफ हो गया है कि विभागीय पर्यवेक्षण व्यवस्था या तो पूरी तरह निष्क्रिय है या मिलीभगत में लिप्त। JE चैंबर जैसी महत्वपूर्ण जगह पर बैठकर नशीली सिरप का सेवन किया जाना न केवल अन्य कर्मचारियों के लिए असहज स्थिति पैदा करता है, बल्कि पूरे परिसर की गरिमा और कार्य संस्कृति को कलंकित करता है।
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे लोगों में आक्रोश और असंतोष और भी बढ़ गया है। आम जनता सवाल कर रही है कि जब सरकारी कर्मचारी ही खुलेआम नशे में डूबे मिलेंगे, तो आम आदमी को बिजली, बिल और शिकायत जैसे विषयों में न्याय और त्वरित सेवा की उम्मीद किससे की जाए?
अब कार्रवाई का वक्त: क्या शासन दिखाएगा ज़ीरो टॉलरेंस या फिर निभाई जाएगी औपचारिकता?
अब इस पूरे प्रकरण पर सबसे बड़ा प्रश्नचिन्ह यह है कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाएगा? क्या आरोपी रिंकू पटेल को सिर्फ निलंबन देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर उसके विरुद्ध आउटसोर्स कंपनी को निर्देश देकर तत्काल निष्कासन और FIR की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी?
इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि केवल निर्देशों और बैठकों से सरकारी व्यवस्था नहीं सुधरेगी, जब तक कि ऐसी घटनाओं पर दृढ़, सार्वजनिक और अनुकरणीय कार्रवाई नहीं होती। यदि इस तरह के मामलों पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती रही, तो यह न केवल शासन की छवि को आघात पहुँचाएगा, बल्कि पूरे समाज में शासकीय तंत्र के प्रति निराशा और अविश्वास और गहराएगा।



