सिरमौर जनपद पंचायत में नेतृत्व संकट चरम पर: अध्यक्ष रवीना साकेत के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, 22 सदस्यों ने जताया असंतोष
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा, मध्यप्रदेश।
रीवा जिले की सिरमौर जनपद पंचायत इन दिनों एक गंभीर नेतृत्व संकट और प्रशासनिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रवीना साकेत के खिलाफ पंचायत के 22 निर्वाचित सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। बुधवार को यह समूचा प्रतिनिधिमंडल रीवा कलेक्ट्रेट पहुंचा और कलेक्टर डॉ. प्रतिभा पाल को बाकायदा लिखित आवेदन सौंपते हुए अध्यक्ष के खिलाफ गंभीर आरोपों की लंबी फेहरिस्त पेश की।
प्रशासनिक अराजकता और संवादहीनता से उपजा असंतोष
जनपद सदस्यों ने अपने आवेदन में पंचायत संचालन में व्यापक अनियमितता, प्रशासनिक अराजकता और पूर्ण नेतृत्वहीनता के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अध्यक्ष रवीना साकेत ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं और पंचायती राज अधिनियम की भावना को ताक पर रख दिया है। नियमित बैठकों का आयोजन नहीं किया जाता, बैठकों का एजेंडा समय पर नहीं दिया जाता, और कई बार सदस्यों को जानबूझकर बैठक से वंचित कर दिया जाता है। इससे सदस्यों को अपनी भूमिका निभाने का अवसर ही नहीं मिल रहा।
वित्तीय जवाबदेही पर सवाल
अविश्वास प्रस्ताव में सबसे गंभीर आरोप वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हैं। सदस्यों ने कहा कि विगत तीन वर्षों से पंचायत का वार्षिक बजट पारित नहीं किया गया है, जिससे विकास कार्य लगभग ठप पड़े हैं। अध्यक्ष द्वारा यात्रा भत्ते, वाहन व्यय तथा अन्य खर्चों का कोई स्पष्ट विवरण प्रस्तुत नहीं किया जाता, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगते हैं।
जनप्रतिनिधियों का अपमान और कामकाज में बाधा
सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि अध्यक्ष का व्यवहार निरंकुश और उद्दंडतापूर्ण है। वे सदस्यों से संवाद नहीं करतीं, उन्हें अपमानित करती हैं, और स्थायी समितियों के गठन या उनके कार्य संचालन में भी अड़ंगे डालती रही हैं। कई सदस्यों ने यह तक कहा कि उनके द्वारा प्रस्तावित विकास कार्यों को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
"यह सत्ता की लड़ाई नहीं, जनहित की लड़ाई है"
इस अविश्वास प्रस्ताव की अगुवाई करने वाले वरिष्ठ सदस्य मिश्रीलाल तिवारी, राजेंद्र सिंह और विनोद सिंह ने कहा कि यह आंदोलन किसी दल या गुट का नहीं, बल्कि आम जनता की आवाज है। राजेंद्र सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा, "हम सत्ता हड़पने नहीं, बल्कि जनसेवा के लिए खड़े हुए हैं। अध्यक्ष जवाबदेही से बचती हैं और जनता के पैसों का हिसाब देने को तैयार नहीं हैं। यह स्थिति अब और बर्दाश्त नहीं की जा सकती।"
कलेक्टर ने दिया जांच का आश्वासन, प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू
कलेक्टर डॉ. प्रतिभा पाल ने आवेदन प्राप्त कर इसे गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार जांच कराने और अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया प्रारंभ कराने का आश्वासन दिया है। अब प्रशासन द्वारा सबसे पहले सदस्यों के हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता की पुष्टि की जाएगी, इसके बाद आरोपों की प्रारंभिक जांच होगी। यदि प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक संख्या में सदस्य प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करते हैं, तो अध्यक्ष पद से रवीना साकेत को हटाया जा सकता है। अन्यथा, वे अपने पद पर बनी रहेंगी।
पंचायती राजनीति में खलबली, जनता की निगाहें प्रशासन पर
यह मामला केवल सिरमौर जनपद तक सीमित न रहकर पूरे रीवा संभाग की पंचायती राजनीति में हलचल मचा चुका है। जनपद पंचायतों में जवाबदेही, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली की मांग इस घटनाक्रम के केंद्र में है। जनता अब यह देखना चाहती है कि क्या प्रशासन निष्पक्ष और तेज़ कार्रवाई करता है या मामला फाइलों में दबा रह जाएगा।
सिरमौर जनपद पंचायत में यह घटनाक्रम केवल अध्यक्ष को हटाने या बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस गहरी पीड़ा का संकेत है जो तब पैदा होती है जब जनप्रतिनिधि खुद को निर्णय प्रक्रिया से कटता हुआ पाते हैं। यह मामला पंचायत प्रणाली में सुधार, जवाबदेही और पारदर्शिता की गूंज बनकर उभरा है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और शासन की ओर टिकी हैं कि वे इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और लोकतंत्र की गरिमा को कैसे बचाते हैं।

