शिक्षा विभाग में 24 लीटर पेंट से 3 लाख का खेल
443 मजदूर, 215 मिस्त्री और लाखों की मजदूरी… रंगाई के नाम पर शहडोल में सरकारी धन की खुली लूट
विंध्य वसुंधरा समाचार शहडोल (मध्यप्रदेश)
"बड़ी दीवार थी क्या?" – यह सवाल इन दिनों शहडोल जिले में आम जनता से लेकर प्रशासनिक गलियारों में तंज के तौर पर पूछा जा रहा है। वजह है – एक सरकारी स्कूल की रंगाई-पुताई का बिल, जिसने सरकारी तंत्र की कार्यशैली और भ्रष्टाचार की जड़ों को फिर उजागर कर दिया है। महज़ 24 लीटर पेंट की रंगाई के लिए 443 मजदूर और 215 मिस्त्री दर्शाकर 3 लाख 38 हजार रुपए की सरकारी राशि निकाल ली गई।
यह मामला न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह जमीनी स्तर से लेकर कार्यालयों तक भ्रष्टाचार की एक श्रृंखला काम कर रही है बिना किसी डर या पारदर्शिता के।
📌 दो स्कूल, एक ठेकेदार, एक तारीख – और लाखों का घोटाला
यह घोटाला शहडोल जिले के ब्यौहारी विकासखंड के दो शासकीय विद्यालयों में सामने आया है –
- शासकीय हाईस्कूल संकदी
- शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निपनिया
दोनों स्कूलों में 5 मई 2025 की तारीख में पेंटिंग और मरम्मत कार्य का बिल कटाया गया, और बिल पास भी हो गया। खास बात यह है कि दोनों कार्यों का ठेका सुधाकर कंस्ट्रक्शन नामक एजेंसी को दिया गया था।
🖌️ रंगाई में बहा पब्लिक मनी – आंकड़ों में घोटाले की तस्वीर
▶ हाईस्कूल संकदी:
- पेंट की मात्रा: 4 लीटर ऑयल पेंट
- पेंट की कीमत: ₹784 (196 रुपये प्रति लीटर)
- कर्मचारी दर्शाए गए: 168 मजदूर + 65 मिस्त्री
- मजदूरी भुगतान: ₹1,06,984
- कुल व्यय: ₹1.25 लाख से अधिक
▶ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निपनिया:
- पेंट की मात्रा: 20 लीटर
- पेंट की कीमत: लगभग ₹3,920
- कर्मचारी दर्शाए गए: 275 मजदूर + 150 मिस्त्री
- मजदूरी भुगतान: ₹2,31,650
- कुल व्यय: ₹2.5 लाख से अधिक
इन दोनों स्कूलों के बिलों में न केवल मजदूरों और मिस्त्रियों की संख्या अस्वाभाविक रूप से अधिक है, बल्कि भुगतान भी असामान्य है — जैसे एक छोटे कमरे की रंगाई में पूरी कॉलोनी को मजदूरी मिल गई हो।
🔎 वायरल बिल से खुला राज, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
इस घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब उक्त बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बिलों पर संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और जिला शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर और सरकारी सील मौजूद थीं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह महज़ एक ठेकेदार का खेल नहीं, बल्कि विभागीय मिलीभगत का हिस्सा है।
कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपाची को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और दोषियों से राशि वसूलने का आदेश भी दे दिया है।
"जांच में अधिक भुगतान की पुष्टि हुई है। दोषियों से वसूली की जाएगी और अन्य स्कूलों के बिलों की भी जांच कराई जाएगी,"
– डॉ. केदार सिंह, कलेक्टर, शहडोल
🤐 जिम्मेदारों की चुप्पी और जवाबदेही पर सवाल
इस पूरे मामले पर जहां शिक्षा अधिकारी जांच का हवाला देकर खुद को अलग दिखा रहे हैं, वहीं हाईस्कूल संकदी के प्राचार्य सुग्रीव शुक्ला ने मीडिया को कोई भी प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया। यह चुप्पी खुद में बहुत कुछ बयां कर रही है।
📚 जब शिक्षा व्यवस्था ही भ्रष्टाचार का केंद्र बने...
शहडोल का यह मामला शिक्षा विभाग की गंभीर गिरावट और अंदरखाने चल रहे भ्रष्टाचार की एक बानगी भर है। जब स्कूलों की बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं होतीं, जब बच्चों को पीने का पानी और शौचालय तक नसीब नहीं होते, तब महज़ 24 लीटर पेंट की रंगाई में लाखों रुपये कैसे बहाए जा सकते हैं?
यह सवाल केवल शहडोल जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश सहित पूरे देश की उस व्यवस्था पर चोट करता है, जिसमें जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों खोती जा रही हैं।
✍️ "कमिशन कल्चर" की रंगाई इतनी मोटी हो चुकी है कि असली रंग दिख ही नहीं रहा?
बिल और बयान सबकुछ सामने है, अब देखना ये है कि क्या वाकई दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी धीरे-धीरे फाइलों में दबकर ‘रंगाई’ हो जाएगा। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले को मिसाल बनाए और शिक्षा विभाग की सभी परियोजनाओं का पुनः ऑडिट करवाए।
क्योंकि ये सिर्फ पैसे की चोरी नहीं है — ये बच्चों की किताबें, स्कूल की दीवारें, और एक समाज की उम्मीदों की दीवारों को दीमक की तरह चाटने वाला अपराध है।

