सोने के सिक्कों के लालच में छली गई जिंदगी: सरोज दुबे आत्महत्या कांड में रीवा पुलिस ने राजस्थान से तीन ठगों को किया गिरफ्तार
फर्जीवाड़े में फंसकर 37 हजार गंवाए, मानसिक तनाव में उठाया आत्मघाती कदम; पुलिस की सतर्कता से आरोपी सलाखों के पीछे
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मध्यप्रदेश
सोने के नकली सिक्कों और पुराने नोटों के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े ने एक निर्दोष व्यक्ति की जान ले ली। 4 जुलाई को रीवा शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत चोपड़ा मोहल्ले में रहने वाले सरोज दुबे ने ठगी का शिकार होकर खुद को गोली मार ली। इस आत्महत्या के पीछे की कहानी जब पुलिस जांच में सामने आई, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। रीवा पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए राजस्थान से तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार कर लिया है।
सोने की लालच में फंसाया जाल, धीरे-धीरे खाली कराया खाता
पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने कंट्रोल रूम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि सरोज दुबे विगत एक महीने से जुबेर खान, यासीन खान और शब्बीर खान पिता हसन खान (निवासी घोड़ा, थाना किशनगंज, राजस्थान) के संपर्क में थे। इन तीनों ने खुद को पुराने नोट और सोने के सिक्के बेचने वाला बताकर सरोज दुबे से विश्वास बना लिया। आरोपियों ने कहा कि वे लाखों के नकली सिक्के सस्ते में दे सकते हैं, जिससे दुबे को मोटा मुनाफा होगा।
सरोज ने इस झांसे में आकर करीब 37 हजार रुपये अलग-अलग चरणों में ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इतना ही नहीं, रकम जुटाने के लिए उन्होंने दूसरों से कर्ज तक लिया। लेकिन जब सिक्के और नोट मिलने की बजाय झूठे वादे, बहाने और संपर्क में कटौती होने लगी, तो वे गहरे मानसिक तनाव में चले गए। ठगी का अहसास होते ही उन्होंने आत्मघात जैसा कठोर कदम उठाया।
साइबर सेल की सूझबूझ और सतर्कता ने सुलझाया मामला
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने इस गंभीर मामले को व्यक्तिगत रूप से संज्ञान में लेते हुए विशेष टीम गठित की। कोतवाली थाना प्रभारी और साइबर टीम ने मिलकर तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों का लोकेशन ट्रेस किया। कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल पेमेंट ऐप्स के जरिए जांच आगे बढ़ाई गई।
सबूतों के आधार पर टीम राजस्थान के किशनगंज पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से तीनों आरोपियों को धरदबोचा। पूछताछ में उन्होंने ठगी की बात स्वीकार की और यह भी माना कि वे पहले भी इस तरह की वारदातों में शामिल रह चुके हैं। तीनों को रीवा लाकर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
सवाल उठाता यह मामला: ठग सक्रिय, लेकिन सतर्क नहीं आम लोग!
यह घटना न सिर्फ ठगी के बढ़ते मामलों की पोल खोलती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे थोड़ी सी लालच और जानकारी के अभाव में आम लोग साइबर अपराधियों का आसान शिकार बन रहे हैं। पुलिस की सजगता और तकनीकी दक्षता से भले ही आरोपी पकड़े गए हों, लेकिन एक जान की कीमत पर मिली यह सफलता कहीं न कहीं व्यवस्था और समाज दोनों पर सवाल छोड़ जाती है।
रीवा पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी तरह के ऑनलाइन लेन-देन या अज्ञात व्यक्तियों से संपर्क में आने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करें। फर्जी ऑफरों के झांसे में न आएं और संदेह होने पर तुरंत नजदीकी थाना या साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।

