निजी कॉलोनियों में नागरिकों के लिए आवागमन संकट गंभीर, न्यायिक हस्तक्षेप से पहले प्रशासनिक समाधान जरूरी — अधिवक्ता बी.के. माला का संभाग आयुक्त को ज्ञापन
रीवा, 8 जुलाई | विशेष रिपोर्ट विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मध्यप्रदेश
रीवा जिले में तेजी से हो रहे निजी भूमि विकास और कॉलोनाइज़ेशन ने जहां शहरीकरण को गति दी है, वहीं अब यह एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। कॉलोनियों में किए गए प्लाटिंग के दौरान बनाए गए रास्तों को न तो विधिवत आम रास्ता घोषित किया गया है और न ही उन्हें राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया गया है, जिसके कारण आम नागरिकों के समक्ष आवागमन को लेकर संकट खड़ा हो गया है।
इस समस्या को लेकर जिला न्यायालय के अधिवक्ता बी.के. माला ने रीवा संभाग आयुक्त को एक विस्तारपूर्वक ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि जिले में प्लाटिंग से निर्मित सभी प्रमुख रास्तों को ‘आम रास्ता’ घोषित कर उन्हें राजस्व रिकॉर्ड में विधिवत दर्ज किया जाए। अधिवक्ता माला ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में नागरिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के साथ-साथ न्यायालयों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ भी तेजी से बढ़ेगा।
प्लाट मालिकों का रास्तों पर स्वामित्व बना रहता है, नागरिक हो रहे प्रताड़ित
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि कॉलोनाइज़र या निजी प्लॉट विक्रेताओं द्वारा सड़कों का नक्शा दर्शाकर प्लॉट बेचे जाते हैं, परंतु संबंधित सड़कें उनके निजी स्वामित्व में बनी रहती हैं। जब वर्षों बाद वहां मकान बन जाते हैं और आबादी बढ़ती है, तब वही रास्ते विवाद का कारण बन जाते हैं। कई मामलों में प्लाट मालिक इन रास्तों को रोक देते हैं या बाउंड्री बनाकर लोगों के आने-जाने पर आपत्ति जताते हैं।
सिविल लाइन, सुखपुरा, गायत्री नगर जैसे क्षेत्र हो रहे प्रभावित
ज्ञापन में कहा गया है कि सिविल लाइन, सुखपुरा मार्ग, अधिवक्ता मार्ग और गायत्री नगर जैसे क्षेत्र इस समस्या से पहले से जूझ रहे हैं। ये वे क्षेत्र हैं जहां वर्षों से लोग रह रहे हैं, लेकिन आज भी रास्ते राजस्व रिकॉर्ड में ‘आम रास्ता’ के रूप में दर्ज नहीं हैं। यह स्थिति कभी भी गंभीर टकराव या कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न कर सकती है।
न्यायालयों पर मुकदमों का बढ़ता भार — प्रशासन पर सवाल
अधिवक्ता माला ने कहा कि ऐसी स्थिति में लोग न्यायालयों की शरण लेते हैं, जिससे न केवल पीड़ितों को आर्थिक व मानसिक हानि होती है बल्कि न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ भी पड़ता है। यह प्रशासन की निष्क्रियता का परिणाम है कि वर्षों से उपयोग में आ रहे सार्वजनिक रास्तों को अब तक विधिवत रूप से दर्ज नहीं किया गया।
ज्ञापन में यह स्पष्ट सुझाव दिया गया है कि:
1. जहां-जहां प्लाटिंग हो चुकी है, वहां के सार्वजनिक उपयोग में आ चुके रास्तों को चिन्हांकित कर उन्हें राजस्व रिकॉर्ड में ‘आम रास्ता’ के रूप में दर्ज किया जाए।
2. नवीन कॉलोनियों के विकास के समय ऐसे रास्तों को नियोजित रूप से रजिस्ट्री प्रक्रिया से बाहर रखते हुए स्थायी रूप से सार्वजनिक मार्ग घोषित किया जाए।
3. पूर्व व वर्तमान कॉलोनियों की समीक्षा कर विवाद की आशंका वाले रास्तों की सूची बनाकर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
जनहित में है यह पहल — प्रशासन दिखाए संवेदनशीलता
यह मांग केवल किसी व्यक्तिगत हित की नहीं, बल्कि रीवा शहर के हजारों नागरिकों के हित से जुड़ी हुई है। यदि प्रशासन समय रहते इस ओर संवेदनशीलता नहीं दिखाता, तो आने वाले समय में यह मुद्दा न केवल प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बनेगा, बल्कि सामाजिक टकराव का कारण भी बन सकता है।

