बरदहा घाटी के रास्ते चल रहा था तस्करी का खेल! रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 2700 लीटर अवैध शराब बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार, संगठित गिरोह की सक्रियता का खुलासा
🖋️ विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा/मऊगंज
रीवा जिले के सिरमौर थाना क्षेत्र में पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी और सराहनीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए 2700 लीटर अवैध देशी शराब बरामद की है। यह बरामदगी एक सुनियोजित और सक्रिय तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करती है, जो लंबे समय से बरदहा घाटी के सुनसान और दुर्गम रास्तों का फायदा उठाकर अवैध शराब की तस्करी को अंजाम दे रहा था।
सूचना पर बिछाया गया था जाल
सिरमौर एसडीओपी उमेश प्रजापति को विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई थी कि एक पिकअप वाहन में भारी मात्रा में अवैध शराब बरदहा घाटी की ओर ले जाई जा रही है। तत्परता दिखाते हुए उन्होंने एक विशेष पुलिस टीम गठित कर घेराबंदी करवाई। पुलिस की घेराबंदी और दबिश के दौरान वाहन को रोका गया और तलाशी लेने पर उसमें से 2700 लीटर अवैध देशी शराब बरामद की गई। इसके साथ ही वाहन में सवार दो तस्करों – अजय सोंधिया उर्फ चन्नू और मनोज वर्मा उर्फ गोलू को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।
बरदहा घाटी: तस्करों के लिए बना सुरक्षित कॉरिडोर
प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह तस्करी एक दो बार की नहीं बल्कि एक संगठित गिरोह के जरिए लंबे समय से की जा रही थी। बरदहा घाटी का रास्ता इसलिए चुना गया क्योंकि यह क्षेत्र पहाड़ी, सुनसान और नियमित पुलिस चेकिंग से दूर है। इस इलाके में लंबे समय से मादक पदार्थों और शराब की आवाजाही की शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन यह पहली बार है जब इतनी बड़ी मात्रा में शराब पकड़ी गई है।
तस्करों के मंसूबों पर फिरा पानी
बरामद सामग्री में करीब 2700 लीटर अवैध देशी शराब के साथ एक कीमती पिकअप वाहन (मूल्य लगभग 6 लाख रुपये) भी शामिल है। इस पूरी कार्रवाई की कुल बाजार कीमत लगभग 15 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए गहन छानबीन कर रही है।
एसडीओपी उमेश प्रजापति ने दी जानकारी:
“यह महज एक शुरुआत है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और हमें यकीन है कि जल्द ही इस तस्करी रैकेट से जुड़े और भी नाम सामने आएंगे। रीवा पुलिस ऐसे माफियाओं को किसी कीमत पर नहीं बख्शेगी।”
रीवा जिले में मादक पदार्थों के विरुद्ध चल रही मुहिम को इस कार्रवाई ने नया बल दिया है। ऐसे समय में जब तस्कर सरकारी व्यवस्था की आंखों में धूल झोंकने के लिए नए-नए रास्ते और तकनीकें अपना रहे हैं, रीवा पुलिस की यह कार्रवाई न केवल साहसिक है, बल्कि यह साबित करती है कि अपराध चाहे जितना भी गुप्त और सुनियोजित क्यों न हो – कानून की पकड़ से बच नहीं सकता।


