सीएम राइज़ संदीपनि स्कूल में शिक्षक से मारपीट: हेडमास्टर के खिलाफ मामला दर्ज, आरोपी फरार
सीएम राइज़ संदीपनि विद्यालय, मनगवां में मंगलवार को उस वक्त सनसनी फैल गई जब विद्यालय परिसर में ही एक शिक्षक के साथ विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा लात-घूँसों से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया। पीड़ित शिक्षक बाल्मीक प्रसाद तिवारी, जो प्राथमिक विभाग में अध्यापक हैं, ने मनगवां थाना में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने आरोपी प्रधानाध्यापक दयाशंकर त्रिपाठी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया एवं शासकीय कार्य में बाधा की धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, स्कूल कार्यालय में दोनों शिक्षकों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और फिर हाथापाई में तब्दील हो गया। आरोप है कि हेडमास्टर ने न केवल गंदी गालियाँ दीं, बल्कि लात-घूँसों से शिक्षक की बेरहमी से पिटाई भी की। इस हमले में बाल्मीक तिवारी के हाथ की एक उंगली टूट गई, जिन्हें इलाज के लिए रीवा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी शिक्षक घटना के बाद से फरार है, जिसकी तलाश जारी है। वहीं विद्यालय के प्राचार्य के.सी. अवधिया ने पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजे जाने की बात कही है।
प्रशासनिक शिथिलता या अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा?
उक्त घटना ने न केवल सीएम राइज़ विद्यालय की अनुशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में बढ़ती अराजकता की चिंताजनक तस्वीर भी सामने रखी है। जहाँ एक ओर राज्य शासन द्वारा इन विद्यालयों को 'मॉडल स्कूल' के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहीं शिक्षकों के मध्य इस प्रकार की घटनाएँ शिक्षा की गुणवत्ता और संस्कारों को गहरे प्रश्नचिन्ह में डालती हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका नहीं है जब उक्त विद्यालय में शिक्षकों के बीच मनमुटाव और व्यवहारिक असंतुलन की शिकायतें सामने आई हों। स्कूल में बच्चों की संख्या हज़ारों में पहुँच चुकी है, भवन भले ही शानदार बन गया हो, लेकिन भीतर का माहौल शिक्षण के लिए कितना सुरक्षित है, यह घटना स्वयं बयान कर रही है।
अब क्या होगी कार्यवाही?
विद्यालयों में ऐसी घटनाएँ केवल शिक्षा व्यवस्था ही नहीं, शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाती हैं। मनगवां जैसे क्षेत्र में जब ‘सीएम राइज़’ जैसी योजनाएँ शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के लिए चलाई जा रही हैं, तब ऐसे घटनाक्रम सरकार की मंशा को पलीता लगाने का काम करते हैं।
जनता, अभिभावक और छात्र-छात्राएँ अब यह जानना चाहते हैं कि क्या केवल एफआईआर दर्ज कर देने भर से बात खत्म हो जाएगी? या फिर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन मिलकर इस अराजकता पर कड़ी कार्यवाही करेगा, ताकि विद्यालयों में फिर से अनुशासन की स्थापना हो सके?


