रीवा जिले में ‘विकास’ सड़क फाड़कर बाहर निकल रहा है! ग्राम्यांचलों में घटिया निर्माण का एक और नमूना, जिम्मेदार मौन
मध्यप्रदेश सरकार भले ही गांव-गांव तक सड़कों के जाल बिछाने और ग्रामीण अंचलों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के दावे कर रही हो, लेकिन रीवा जिले में ‘विकास’ का असली चेहरा इन दिनों सड़क किनारे नाले में लुढ़की पड़ी सीमेंट पाइप और धंसी हुई सड़कें खुद बयान कर रही हैं। यह तस्वीर बताती है कि यहां विकास सड़क से बाहर निकल रहा है – और वो भी मुंह के बल!
यह दृश्य है नईगढ़ी जनपद अंतर्गत एक ग्रामीण संपर्क मार्ग का, जहां हाल ही में करोड़ों रुपये की लागत से कच्ची सड़क में नाला निर्माण और पाइप लाइन डाली गई थी। लेकिन पहली ही बारिश ने विभागीय लापरवाही और ठेकेदार की घटिया निर्माण शैली की पूरी पोल खोल दी।
बारिश आई... और सड़क बह गई!
तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि सीमेंट पाइप आधे से ज्यादा बाहर आ चुकी है, मिट्टी बह गई है और सड़क का हिस्सा धंस चुका है। न तो पाइप के दोनों ओर मजबूत पकड़ के लिए उचित कम्पेक्शन किया गया था, न ही जल निकासी की समुचित व्यवस्था छोड़ी गई। ऐसे में यह हादसा नहीं तो और क्या है कि अब राहगीरों को जान हथेली पर रखकर इस मार्ग से गुजरना पड़ रहा है।
ग्रामीण बोले – साहब निरीक्षण तो खूब हुआ, पर काम... आधा अधूरा!
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क का निर्माण दो माह पहले ही हुआ था। निर्माण के दौरान कई बार अधिकारियों ने ‘मुआयना’ भी किया, पर ज़मीन पर गुणवत्ता का कोई अता-पता नहीं। मिट्टी डालकर ऊपर से रोलर चला दिया गया, परंतु पानी बहाव और पाइप सेटिंग जैसे जरूरी तकनीकी बिंदुओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
जनता पूछ रही है – कौन है जिम्मेदार?
क्या पंचायत सचिव? क्या जनपद अधिकारी? क्या ग्रामीण यांत्रिकी विभाग?
जब-जब ऐसी घटनाएं होती हैं, जिम्मेदार अधिकारी 'बारिश' को दोषी ठहरा देते हैं, परंतु वास्तविक दोषियों पर कार्यवाही के नाम पर सब कुछ रफा-दफा कर दिया जाता है। न कोई नोटिस, न जवाबदेही।
अब सवाल उठता है –
क्या जिला प्रशासन इस सड़क को दोबारा बनवाएगा?
क्या ठेकेदार की गारंटी अवधि में इस पर कार्य होगा?
क्या दोषियों पर होगी सख्त कार्यवाही या सब कुछ ढँक दिया जाएगा चुप्पी की चादर में?
विकास चाहिए, दिखावा नहीं!
रीवा जिले की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे विंध्य अंचल की बदहाल बुनियादी संरचना की प्रतीक है। सरकार की योजनाएं तभी सार्थक होंगी, जब जमीनी स्तर पर गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित हो।

