रीवा की बाढ़ पर फूटा जन आक्रोश: परशुराम आश्रम पर बुलडोज़र, नेताओं के अवैध निर्माण पर मौन क्यों?
शिवानंद द्विवेदी का बड़ा आरोप: विधायक नागेंद्र सिंह के होटल और नदी किनारे के अवैध निर्माण बने बाढ़ की वजह, नगर निगम आयुक्त सौरभ सोनवड़े को हटाने की मांग
विंध्य वसुंधरा समाचार की विशेष रिपोर्ट रीवा मध्यप्रदेश
रीवा जिले में हालिया आई बाढ़ से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जहां एक ओर नदियों का पानी शहर की गलियों, कॉलोनियों और घरों में घुस गया, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता और राजनीतिक संरक्षण में पनपते अवैध निर्माणों ने इस त्रासदी को और भयावह बना दिया।
इस बाढ़ त्रासदी के बाद सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने नगर निगम प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि, “यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नेताओं, प्रशासन और सिस्टम की सुनियोजित नाकामी है।”
बाढ़ के लिए जिम्मेदार कौन? - शिवानंद द्विवेदी ने उठाए तीखे सवाल
शिवानंद द्विवेदी ने रीवा नगर निगम आयुक्त संजय सौरभ सोनवड़े पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि, “बारिश से पहले नालों की सफाई, सीवर लाइन का मेंटेनेंस और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। केवल दिखावे की खानापूर्ति हुई, नतीजा यह हुआ कि पूरा शहर जलमग्न हो गया।”
उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई एकतरफा है—गरीबों और आम लोगों के घरों को अतिक्रमण बताकर ध्वस्त किया जा रहा है, जबकि नेताओं, रसूखदारों और बिल्डर माफियाओं के अवैध निर्माणों को संरक्षण मिल रहा है।
विधायक नागेंद्र सिंह के निर्माण बने बाढ़ का कारण?
द्विवेदी ने गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह के अवैध निर्माणों को बाढ़ की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि उनका बीहर नदी किनारे बना आलीशान आवास और झिरिया नाले पर स्थित होटल एनजीटी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हैं।
उन्होंने कहा कि, “एनजीटी के नियमों के अनुसार नदी या नाले के किनारे 200 मीटर के भीतर किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण प्रतिबंधित है। लेकिन नागेंद्र सिंह का आवास मात्र 50 मीटर दूरी पर बना हुआ है। झिरिया नाले पर बने उनके होटल ‘स्नेह’ और ‘महाराजा’ भी पूरी तरह अवैध हैं। इन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।”
परशुराम आश्रम पर बुलडोज़र, नेताओं पर रहम क्यों?
द्विवेदी ने याद दिलाया कि इटौरा बायपास के पास स्थित परशुराम आश्रम को विधायक नागेंद्र सिंह की शिकायत पर अवैध बताकर ध्वस्त कर दिया गया था। यह वही आश्रम था जहां चित्रकूट से आए साधु-संतों ने विरोध में धरना तक दिया था।
“अगर परशुराम आश्रम को सिर्फ इसलिए गिराया गया क्योंकि वह कथित अतिक्रमण था, तो फिर नेताओं और विधायकों के अवैध निर्माणों पर बुलडोज़र क्यों नहीं चलाया गया?” — शिवानंद द्विवेदी
उन्होंने इसे “एक देश, दो कानून” की परंपरा करार देते हुए कहा कि “गरीबों और आम नागरिकों के लिए प्रशासन शेर बन जाता है, लेकिन नेताओं के आगे निरीह बकरी बन जाता है।”
"सिर्फ आम लोगों के लिए बुलडोजर नहीं, रसूखदारों पर भी चले कार्रवाई की आंधी"
शिवानंद द्विवेदी ने रीवा के जिला प्रशासन और नगर निगम की भूमिका पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि, “रतहरा तालाब, इंजीनियरिंग कॉलेज के पास की बस्ती, पॉलिटेक्निक परिसर और अन्य क्षेत्रों में गरीबों के आशियानों पर बुलडोज़र चलाकर उन्हें उजाड़ दिया गया, लेकिन बीहर नदी, बिछिया नदी और झिरिया नाले के किनारे बने नेताओं और बिल्डरों के पक्के निर्माण आज भी सुरक्षित खड़े हैं।”
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस दबाव में प्रशासन काम कर रहा है? और किसके इशारे पर गरीबों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है?
जनता से अपील: अब चुप मत रहो, आवाज उठाओ!
द्विवेदी ने आमजन से आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब जनता को इन दोहरे मापदंडों के खिलाफ सड़क पर उतरना चाहिए।



