“नशे के सौदागर हों सावधान, जनता अब जाग रही है” — मऊगंज के जड़कुड़ में आईजी गौरव राजपूत ने भरी हुंकार
“आपका आईजी आपके द्वार” कार्यक्रम में ग्रामीणों से सीधा संवाद — साइबर ठगी, महिला सुरक्षा और पुलिस-पब्लिक भागीदारी पर दिया प्रेरक संदेश
📍 विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मध्यप्रदेश
रीवा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) गौरव राजपूत ने शनिवार को मऊगंज जिले के आदिवासी बहुल ग्राम जड़कुड़ में “आपका आईजी आपके द्वार” कार्यक्रम के अंतर्गत जनचौपाल का आयोजन कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। यह कार्यक्रम न केवल जनसुनवाई का माध्यम बना, बल्कि ग्रामीणों को नशे के खिलाफ जागरूक करने और साइबर अपराध की चालबाजियों से सतर्क करने का एक सशक्त मंच भी साबित हुआ।
"मेडिकल नशा गांव-गांव में ज़हर बनकर फैल रहा है" — आईजी राजपूत
सरकारी हाईस्कूल परिसर में आयोजित इस जनचौपाल में सैकड़ों ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और विद्यार्थी शामिल हुए। आईजी गौरव राजपूत ने कहा,
“गांवों में अब केवल शराब ही नहीं, मेडिकल नशा — जैसे कोरेक्स, फेंसिडिल, इंजेक्शन और टेबलेट्स — युवाओं को निगल रहा है। 6 महीने से 1 साल तक इनका सेवन शरीर को अंदर से खोखला कर देता है। यह कोई व्यक्तिगत बीमारी नहीं, बल्कि सामाजिक महामारी है, जिससे मिलकर लड़ना होगा।”
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि किसी को नशे की अवैध बिक्री या भंडारण की जानकारी हो तो वे तुरंत मोबाइल नंबर 9479997336 पर पुलिस को सूचना दें।
आपका नाम और पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सटीक जानकारी देने पर नकद इनाम भी मिलेगा।”
साइबर अपराध के नए हथकंडों से रहें चौकन्ना
विकसित तकनीक के साथ ठगों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं। आईजी राजपूत ने उपस्थित जनसमूह को सचेत करते हुए बताया कि—
“आजकल अपराधी बैंक अधिकारी, रिश्तेदार, कंपनी प्रतिनिधि या फर्जी सरकारी अफसर बनकर फोन करते हैं। कभी वीडियो कॉल, कभी ऐप डाउनलोड कराने या ओटीपी मांगने का बहाना बनाते हैं। इनसे सावधान रहें। कभी भी अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।”
उन्होंने कहा कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर फेक प्रोफाइल बनाकर भी ठगी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
“अगर किसी भी तरह की ठगी हो जाए, तो घबराएं नहीं, तुरंत डायल 100 या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं। हर थाने में अब साइबर हेल्प डेस्क भी बनाई गई है।”
"महिला सुरक्षा सिर्फ पुलिस की नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है"
महिलाओं के साथ होने वाली किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना पर खुलकर बोलते हुए आईजी राजपूत ने कहा—
“यदि किसी महिला को घर, रास्ते, स्कूल या कार्यस्थल पर उत्पीड़न झेलना पड़े तो बिना झिझक पुलिस को सूचित करें। यह समाज की गरिमा से जुड़ा सवाल है।”
उन्होंने वैदिक श्लोक “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:” का उल्लेख करते हुए कहा कि—
“जहां स्त्रियों का सम्मान होता है, वहीं देवता भी निवास करते हैं। इसलिए महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
"पुलिस आपकी सेवा में है, शिकायत हो तो डरें नहीं, बताएं"
आईजी राजपूत ने पुलिसकर्मियों के व्यवहार और जिम्मेदारियों पर भी खुलकर बात की उन्होंने ग्रामीणों से स्पष्ट कहा—
अगर कोई पुलिसकर्मी गलत व्यवहार करे या काम के बदले अनुचित मांग करे तो उसकी शिकायत सीधे एसपी मऊगंज या मेरे पास करें। मैं रीवा में हूं, और आपकी सेवा में हर समय उपलब्ध हूं।”
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस अब केवल डंडे की भाषा नहीं बोलती, वह जनसेवा की भूमिका में है।
“पुलिस आपकी दोस्त है, डरने की नहीं, भरोसा करने की जरूरत है।”
गांव-गांव नशा विरोधी जनजागरण की ज़रूरत
कार्यक्रम के समापन पर आईजी राजपूत ने ग्रामीणों से आह्वान किया कि—
अगर आप सचमुच अपने गांव को सुरक्षित, नशामुक्त और अपराधमुक्त बनाना चाहते हैं, तो हर सूचना, हर संदेह पुलिस तक पहुंचाएं। आप जागरूक होंगे तो अपराध खुद सिमट जाएगा।”
उपस्थित रहे कई प्रशासनिक अधिकारी व समाजसेवी
इस जनचौपाल में एसपी मऊगंज दिलीप सोनी, एसडीएम रश्मि चतुर्वेदी, एएसपी विक्रम सिंह, टीआई गिरीश दुर्गे, टीआई सनत द्विवेदी, टीआई अनिल काकडे, समाजसेवी पंकज पांडेय, जनप्रतिनिधि, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षकों सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
आईजी गौरव राजपूत द्वारा गांव की मिट्टी में बैठकर संवाद करना केवल एक कार्यक्रम नहीं था, यह पुलिस और आमजन के बीच विश्वास की एक नई शुरुआत थी। यदि यह अभियान निरंतर जारी रहा, तो विंध्य क्षेत्र को नशा, अपराध और डर से मुक्त होते देर नहीं लगेगी।






