"रीवा जिले की गढ़ थाना क्षेत्र अगड़ाल पंचायत दो महीने से अंधेरे में — जला ट्रांसफार्मर नहीं बदला, जनता त्रस्त, जिम्मेदार मौन"
रीवा जिले के गढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत अगड़ाल (पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़) के वार्ड क्रमांक 7 एवं वार्ड क्रमांक 4 के निवासी विगत दो महीनों से जले हुए ट्रांसफार्मर के कारण गहरे अंधकार में जीवन गुजारने को विवश हैं। इतनी लंबी अवधि में ट्रांसफार्मर का न बदला जाना प्रशासनिक संवेदनहीनता और लापरवाही का जीवंत उदाहरण है।
इस आपदा के बीच गांव के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बिजली की अनुपलब्धता के चलते पेयजल संकट, संचार बाधा, सुरक्षा जोखिम और सामान्य जीवनचर्या पूरी तरह चरमरा चुकी है। ग्रामीण हैंडपंप से पानी खींच नहीं पा रहे, बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे, मोबाइल चार्ज नहीं हो रहे और पूरा गांव घुप अंधेरे में डूबा हुआ है।
बरसात के इस मौसम में जब नाले-नदियाँ उफान पर हैं, हर ओर कीचड़ और पानी भरा है, ऐसे में बिजली न होना जानलेवा खतरे को आमंत्रण दे रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि अंधेरे का फायदा उठाकर सांप-बिच्छू जैसे विषैले जीव खुलेआम घूमते हैं, जिससे हर दिन जान का खतरा मंडराता है।
प्रशासन बेखबर, जनप्रतिनिधि गायब
गांववालों ने दर्जनों बार बिजली विभाग, पंचायत सचिव, जनपद प्रतिनिधियों और क्षेत्रीय विधायक तक गुहार लगाई है, लेकिन शिकायतें सिर्फ कागज़ों में दबी रह गईं। आश्चर्यजनक यह है कि एक बुनियादी सुविधा—बिजली—जिस पर सरकारें करोड़ों खर्च करने का दावा करती हैं, वही रीवा जिले के इस गांव में महीनों से नदारद है।
ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया तो वे प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव करेंगे, हाईवे जाम करेंगे और बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
"आखिर जवाबदेह कौन?"
प्रश्न यह है कि जब बिजली विभाग की जिम्मेदारी है कि किसी भी क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर को 72 घंटे के भीतर बदला जाए, तो दो महीने बीत जाने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को जानबूझकर अनदेखा करने की सरकारी नीति?
जनता पूछ रही है — "जिसे हमने चुना वही अब हमारी पुकार क्यों नहीं सुन रहा?"
अब वक्त आ गया है कि रीवा जिला प्रशासन, बिजली विभाग और संबंधित विधायक इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लें और अगड़ाल पंचायत में तत्काल नया ट्रांसफार्मर लगवाकर बिजली आपूर्ति बहाल करें, अन्यथा यह मामला जल्द ही जनाक्रोश की आग में तब्दील हो सकता है।


