रीवा में बाढ़ की असली जड़: ग्रीन बेल्ट में अतिक्रमण — एनजीटी नियमों की उड़ रही धज्जियां, प्रशासन करे कठोर कार्रवाई : एडवोकेट बी.के. माला
शहर को जल प्रलय से बचाना है तो सबसे पहले नदी-नालों के ग्रीन जोन को अतिक्रमण मुक्त करना होगा
हर साल बरसात के मौसम में जलजमाव और बाढ़ की चपेट में आने वाला रीवा शहर आज जिस भयावह स्थिति में पहुंचा है, उसका सबसे बड़ा कारण खुद शहर के भीतर फैलता अतिक्रमण है। यह कहना है सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय एडवोकेट बी.के. माला का। उन्होंने कहा है कि नदी-नालों के ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में हो रहे अवैध निर्माण ही शहर की बाढ़ और जलभराव की असली वजह हैं, और अब इन पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
एडवोकेट माला ने दो टूक कहा कि जो लोग प्रतिबंधित क्षेत्रों में मकान, होटल, लॉज, या अन्य व्यावसायिक निर्माण कर रहे हैं, वही आज शहर के डूबने की वजह बने हुए हैं। इन अतिक्रमणकारियों की वजह से जल निकासी के प्राकृतिक मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। बारिश का पानी अब बहने की जगह नहीं पा रहा है, और यही कारण है कि मामूली वर्षा भी तबाही का रूप ले रही है।
उन्होंने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा चिन्हित ग्रीन बेल्ट क्षेत्र प्रकृति के लिए आरक्षित होते हैं। यह भू-भाग नदियों-नालों के किनारे स्थित होते हैं, जहां किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण निषेध है। लेकिन रीवा शहर में बढ़ती भूख और स्वार्थ के चलते इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कई स्थानों पर लोग अपने निजी लाभ के लिए नदियों के किनारे होटल-लॉज, दुकानें और मकान बनाकर पूरे शहर को जल संकट में झोंक रहे हैं।
एडवोकेट माला का कहना है कि यह विडंबना ही है कि अब यही लोग शासन-प्रशासन पर उंगली उठा रहे हैं। जिन्होंने नियम तोड़े, वही अब खुद को पीड़ित बताकर बाढ़ का दोष सरकार के सिर मढ़ रहे हैं। मानो प्रशासन ने उन्हें जबरन नाले के मुहाने पर घर बनवाया हो! यह न केवल हास्यास्पद है बल्कि एक संगठित अपराध की तरह देखा जाना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि —
ग्रीन बेल्ट में किए गए सभी अवैध निर्माणों की पहचान की जाए और चिन्हित लोगों पर NGT अधिनियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
जल निकासी मार्गों से अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए और ग्रीन जोन को पुनः बहाल किया जाए।
ऐसे मामलों को “प्राकृतिक आपदा की साजिश” मानते हुए उच्चस्तरीय जांच की जाए।
एडवोकेट माला ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं करता, तो वे स्वयं एनजीटी सहित पर्यावरण मंत्रालय, उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक शिकायत दर्ज कराएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही वे स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों के साथ मिलकर “ग्रीन बेल्ट बचाओ - रीवा बचाओ” अभियान शुरू करने जा रहे हैं।
“जब तक नदियों-नालों के किनारे से अतिक्रमण नहीं हटेगा, रीवा हर साल बाढ़ का शिकार होता रहेगा। ये सिर्फ प्रशासन की नहीं, हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है” — एडवोकेट बी.के. माला
एनजीटी एक्ट 2010 के तहत नदी-नालों से 50 से 100 मीटर तक के क्षेत्र को संरक्षित ग्रीन बेल्ट घोषित किया गया है।
इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य वर्जित है।उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना, विध्वंस और आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है।रीवा शहर को हर साल जलसंकट और बाढ़ से बचाना है तो सबसे पहले पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखने वालों पर कठोर कार्रवाई करनी होगी। ग्रीन बेल्ट को पुनः संरक्षित करना ही
इस शहर के सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।

