रीवा जिले में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़: ग्राम पंचायत गढ़ में तैयार भवन के बावजूद आंगनवाड़ी चल रही है पंचायत भवन में
विंध्य वसुंधरा समाचार की विशेष रिपोर्ट रीवा मध्यप्रदेश 3 जुलाई 2025
बच्चों की जान जोखिम में, पांच वर्षों से बिना मुंडेर के खुले बोरवेल के पास संचालित हो रहा केंद्र क्रमांक 6 — जिम्मेदारों की चुप्पी शर्मनाक
रीवा जिले की गंगेव जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़ में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और ज़मीनी हकीकत के बीच गहरी खाई साफ तौर पर देखी जा सकती है। यहां स्थित आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 6 का नया भवन पांच वर्षों पूर्व बनकर तैयार हो चुका है, बावजूद इसके, यह आज तक पंचायत भवन में ही संचालित हो रहा है। इससे न सिर्फ शासन की मंशा पर सवाल उठते हैं, बल्कि उन मासूम बच्चों की सुरक्षा भी संकट में है जो प्रतिदिन इस अस्थायी केंद्र में समय बिताते हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि पंचायत भवन परिसर में वर्षों से एक गहरा बोरवेल और कुआं खुला पड़ा है। ऐसे में यदि कोई मासूम उस बोरवेल में गिर जाए, तो जवाबदेही किसकी होगी? क्या जिले के वरिष्ठ अधिकारियों तक यह तथ्य नहीं पहुंचा या जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया गया?
प्रशासनिक लापरवाही या व्यवस्थागत विफलता?
यह आश्चर्यजनक है कि जब सरकार आंगनवाड़ी के माध्यम से बच्चों को पोषण, पूर्व-शिक्षा और सुरक्षा देने की बात करती है, तब गढ़ जैसी पंचायतों में यह योजना कागजों पर तो सफल दिखती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत बेहद डरावनी है। क्या सिर्फ नामपट्ट (बोर्ड) लगा देने भर से सरकार की जवाबदेही पूरी हो जाती है?
ऐसा प्रतीत होता है जैसे संबंधित विभागों ने यह मान लिया है कि तीन से छह वर्ष के बच्चे बोर्ड नहीं पढ़ सकते, इसलिए उनके लिए भवन, सुविधा और सुरक्षा का विशेष महत्व नहीं है। यही सोच ग्राम पंचायत गढ़ की स्थिति को दर्शाती है, जहाँ एक ओर आंगनवाड़ी भवन बनकर तैयार है, तो दूसरी ओर बच्चे जोखिम भरे हालातों में रह रहे हैं।
जनता को नहीं, सिर्फ रिकॉर्ड को संतुष्ट करना उद्देश्य?
सूत्रों के अनुसार, भवन निर्माण कार्य को रिकॉर्ड में पूर्ण दिखा दिया गया है और संबंधित ठेकेदार से भुगतान भी हो चुका है। लेकिन भवन क्यों उपयोग में नहीं लाया गया, इसका कोई स्पष्ट उत्तर जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे पा रहे हैं।
क्या भवन की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न है, या फिर इसे उपयोग में लाने से संबंधित कोई राजनीतिक या व्यक्तिगत टकराव है? ऐसी स्थिति में यह आवश्यक हो जाता है कि जनपद पंचायत के सीईओ, बाल विकास परियोजना अधिकारी और ग्राम पंचायत सचिव को इस मामले में व्यक्तिगत उत्तरदायित्व तय किया जाए।
बच्चों की जान की कीमत पर क्यों हो रही प्रशासनिक चूक?
रीवा जिले के कलेक्टर समय-समय पर संभावित दुर्घटनाओं वाले स्थलों की पहचान कर उन्हें त्वरित रूप से दुरुस्त करने के निर्देश जारी करते हैं। हाल ही में जिलेभर में खुले बोरवेल को बंद कराने की मुहिम चलाई गई थी। फिर गढ़ पंचायत में खुले बोरवेल की अनदेखी क्यों हुई? क्या अधिकारी वर्ग सिर्फ सोशल मीडिया और कागजों तक सीमित हो गए हैं?
यदि कोई दुर्घटना घटती है, तो क्या उसका जिम्मा सिर्फ मातहत कर्मचारी उठाएंगे या जिले के शीर्ष अधिकारी भी इस जवाबदेही में खुद को शामिल करेंगे?
यह सिर्फ एक पंचायत की कहानी नहीं...
गढ़ पंचायत की यह स्थिति शायद अकेली नहीं है। यदि जिले की अन्य पंचायतों में भी इसी तरह की व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो यह रीवा जिले की बाल सुरक्षा और शासकीय योजनाओं की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
यह समय है कि जिला प्रशासन आंखें खोलकर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए, जिम्मेदारों पर कार्यवाही करे और उस भवन को तत्काल उपयोग में लाकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।





