रीवा में बिजली करंट की राजनीति! किसान की जिंदगी झुलसती रहती है, नेता विकास के नाम पर मौन
रीवा जिले में एक व्यक्ति कटिया करेंट में फसने से मौत एक किसान खेत में करंट से झुलस कर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की जुबान पर ताले लगे हैं और प्रशासन की आंखें अब भी बंद हैं। सरकार की नाक के नीचे वर्षों से गांव-गांव में फैला ट्रांसफार्मर से ‘कटिया कनेक्शन रैकेट’ न केवल भ्रष्टाचार की खुली मिसाल बन चुका है, बल्कि अब जनजीवन के लिए घातक जाल बन गया है।
गढ़ थाना क्षेत्र में दर्दनाक मौत, बिजली का करंट बना काल
गढ़ थाना क्षेत्र के गोरहा तालाब के पास मंगलवार 29 जुलाई को दोपहर लगभग ढाई से तीन बजे के बीच करंट की चपेट में आने से अधेड़ व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान अगनू साकेत (52 वर्ष), पिता रामफल साकेत, निवासी ग्राम गढ़ के रूप में हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोरहा तालाब के पास एक सूखा बबूल का पेड़ गिरा हुआ था, जिसमें अवैध कटिया तार से बिजली प्रवाहित हो रही थी। पेड़ के नीचे पानी भरा हुआ था। जैसे ही अगनू साकेत संपर्क में आए, उन्हें जोरदार करंट लगा और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
सूचना मिलते ही गढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू की। थाना प्रभारी अवनीश पांडे ने बताया कि यह करंट से हुई मौत का मामला प्रतीत हो रहा है, जिसकी विस्तृत जांच जारी है। शव को पोस्टमार्टम हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव भेजा गया है।
गढ़ थाना क्षेत्र की दूसरी घटना
कटिया कनेक्शन बना मौत का जाल — खेत में उतरा करंट, किसान जिंदगी के लिए जूझ रहा
14 जुलाई 2025 को गढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम जमुई खुर्द निवासी सत्यनारायण पटेल अपने खेत में ट्रैक्टर से जुताई कर रहे थे। खेत के पास लगे ट्रांसफार्मर से ग्रामीणों द्वारा कटिया तार खींचे गए थे। जब उन्होंने गिरे हुए तार हटाने का प्रयास किया, तो तेज करंट का झटका लगा और वे गंभीर रूप से झुलस गए।
घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजन और ग्रामीण उन्हें तत्काल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल रीवा ले गए, जहां से हालत गंभीर होने पर नागपुर के लता मंगेशकर हॉस्पिटल रेफर किया गया। सत्यनारायण पटेल अब जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधि, बिजली विभाग और प्रशासन — तीनों ही चुप्पी साधे बैठे हैं।
उपमुख्यमंत्री का क्षेत्र, लेकिन जवाबदेही शून्य!
यह कोई सामान्य तकनीकी चूक नहीं, बल्कि सत्ताधारी नेतृत्व की संवेदनहीनता और शासन-प्रशासन की लापरवाही का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
राजेन्द्र शुक्ल वर्तमान में मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री और ‘विकास पुरुष’ हैं। पिछले दो दशकों से वे सत्ता के शीर्ष में भागीदारी कर रहे हैं, लेकिन आज उन्हीं के गृह जिले के किसान बिजली के करंट से झुलसकर मरने की कगार पर हैं।
क्या यह सवाल उठाना गलत होगा कि रीवा की जनता की जान की कीमत चुनावी भाषणों और विकास के होर्डिंग्स से भी कम रह गई है?
कटिया कनेक्शन नहीं, सत्ता-संरक्षित मौत का तंत्र
गांव-गांव में ट्रांसफार्मर से अवैध कटिया तार बिछाकर बिना खंभों के बिजली पहुंचाई जा रही है।
नियमों के विरुद्ध 50 मीटर से अधिक दूरी तक कटिया खींचना अपराध है, लेकिन यहां तो 500-1000 मीटर तक तार फैले हुए हैं।
ठेकेदार व बिजली विभाग के कर्मचारी घूस लेकर अवैध कनेक्शन बांट रहे हैं और पूरे सिस्टम में कोई जवाबदेह नहीं। यह कोई तकनीकी त्रुटि नहीं — यह सत्ता संरक्षित हत्या का जाल है।
सवाल यह भी है कि-
जिला कलेक्टर अब तक घटनास्थल का निरीक्षण क्यों नहीं कर पाए?
बिजली विभाग ने एफआईआर दर्ज कर जिम्मेदारों पर कार्यवाही क्यों नहीं की?
क्यों नहीं हुई विद्युत आपूर्ति के संपूर्ण सिस्टम की जांच?
क्या प्रशासन केवल मुआवज़े और बयानबाजी तक सीमित है या सच में जवाबदेही तय करेगा?
किसान, खेत और करंट — क्या यही है विकास का चेहरा?
यह हादसा उस रीवा में हुआ है जो विंध्य की राजनीति का केंद्र रहा है। यही वह क्षेत्र है जहां विकास की नुमाइशें लगती हैं और जनप्रतिनिधि ‘विकास पुरुष’ के नारों से सभाएं करते हैं।
लेकिन जमीन पर गांवों में बिजली नहीं, करंट बह रहा है — और नेता सोशल मीडिया पर चुप्पी का कंबल ओढ़े बैठे हैं। क्या अब भी इस ‘विकास के नायक’ से यह सवाल पूछना अपराध होगा कि आपके क्षेत्र के किसानों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
विकास अब वाक्य नहीं, विडंबना बन चुका है। अगर रीवा जैसा संभागीय मुख्यालय ही बिजली के तारों से लोगों को जला रहा है, तो शेष ग्रामीण अंचलों की स्थिति की कल्पना भी भयावह है।
सरकार के पास अब दो ही विकल्प है।
या तो इस ‘करंट वाले विकास’ को स्वीकार करें
या जनता की पीड़ा को सुनें, नींद से जागें और दोषियों को सजा दिलाएं।
विंध्य वसुंधरा समाचार इस तथ्यों की स्वतंत्रता पूर्वक पुष्टि नहीं करता है किंतु यह स्थिति अत्यंत चिंतनीय है। जिले के वरिष्ठ अधिकारी एवं ईमानदार नेताओं और जनप्रतिनिधियों को इस मामले में त्वरित कार्यवाही कर पीड़ित परिवार की मदद करनी चाहिए, जिससे प्रदेश की जनता खुशहाल और सुरक्षित जीवन जी सके।


