बाढ़ में फंसे लोगों के बीच पहुंचे श्यामलाल द्विवेदी और कौशलेश तिवारी, बोले ग्रामीण – यही हैं असली जनसेवक!
वर्तमान विधायक सिद्धार्थ तिवारी दिल्ली में कर रहे मॉनिटरिंग, जनता बोली – हमें सेवक चाहिए, विज्ञापन नहीं
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मऊगंज
लगातार 18 घंटे की भारी बारिश और बांधों से छोड़े गए जल के चलते त्यौंथर तहसील का पूर्वी इलाका गंभीर बाढ़ संकट में घिर गया। सैकड़ों घर ढह गए, कई परिवारों की ज़िंदगी खतरे में पड़ गई। इस आपदा में जहाँ सरकारी तंत्र की रफ्तार धीमी पड़ी, वहीं जनता को राहत देने के लिए पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी और भाजपा नेता कौशलेश तिवारी स्वयं मौके पर पहुंचे और हर संभव मदद सुनिश्चित की।
सूचना मिलते ही दोनों नेताओं ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना बाढ़ प्रभावित गांवों – सोनौरी, बजरा, रायपुर, पडरी, बारीकला सहित अन्य इलाकों का दौरा किया। पीड़ितों से वन-टू-वन संवाद किया, प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर बुलाकर सर्वे और राहत कार्यों को तेज कराया। स्थानीय लोगों ने कहा, “जो संकट की घड़ी में साथ खड़ा हो वही असली जनसेवक होता है। यहां तो कुछ नेता सिर्फ फोटो और रील बनाने आते हैं, लेकिन श्यामलाल द्विवेदी और कौशलेश तिवारी ने दिल से हमारी सुध ली।”
दिल्ली में विधायक, गांवों में बाढ़
इस विपदा के दौरान त्यौंथर के वर्तमान विधायक सिद्धार्थ तिवारी दिल्ली में रहे और सोशल मीडिया के ज़रिए बाढ़ की 'मॉनिटरिंग' करते दिखाई दिए। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि वे अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं, लेकिन जमीनी हालात और ग्रामीणों की बातें उनकी कथनी को खोखला साबित कर रही हैं। ग्रामीणों ने दो टूक कहा – “हमें एयरपोर्ट नहीं, संकट में साथ देने वाला जनप्रतिनिधि चाहिए।”
जनता की उम्मीदें और सवाल
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात और हवाई सुविधा की मांग जैसे विषयों पर सवाल उठाते हुए लोगों ने कहा, “जब गांवों में घर गिर रहे हैं, लोग तड़प रहे हैं, ऐसे वक्त में जनता को राहत और सहारा चाहिए, न कि एयरपोर्ट और एयरप्लेन।”
त्यौंथर की जनता इस आपदा में जिन नेताओं को ज़मीन पर उतरा देख रही है, उन्हें ही अपना सच्चा प्रतिनिधि मान रही है। सवाल यह भी है कि क्या अगले चुनावों में यह भरोसा 'फोटोशूट' नहीं, 'फील्डवर्क' पर आधारित होगा?



