रीवा स्वास्थ्य तंत्र में आदेशों की खुलेआम अवहेलना उच्च न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी, प्रशासनिक अराजकता की शर्मनाक बानगी
न्यायपालिका को ठेंगा, जवाबदेही गायब – क्या यही है “स्वस्थ” प्रशासन?
विंध्य वसुंधरा समाचार | रीवा
रीवा जिले का स्वास्थ्य महकमा इन दिनों गहरे सवालों के घेरे में है। एक ओर जहाँ उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर आदेशों को दरकिनार कर अधिकारी अपनी मनमानी पर उतरे हुए हैं। यह स्थिति न केवल न्यायिक अवमानना की ओर इशारा करती है, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता और उत्तरदायित्व के पतन की सजीव मिसाल भी है।
स्थानांतरण का विवाद बना न्यायिक आदेश की अवहेलना का मामला
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) अंतर्गत कार्यरत लेखापाल लवी पाण्डेय (कर्मचारी क्रमांक NHM-011704) का स्थानांतरण 10 जून 2025 को आदेश क्रमांक /एन.एच.एम./एच.आर./2025/14029 के अनुसार सीएचसी सिरमौर किया गया था। लवी पाण्डेय ने इस स्थानांतरण को उच्च न्यायालय जबलपुर में चुनौती दी, जिस पर माननीय न्यायालय ने 25 जुलाई 2025 को आदेश पारित करते हुए याचिका WP 23495/2025 में स्थानांतरण को निरस्त कर दिया और उन्हें यथास्थान – जिला चिकित्सालय रीवा – में पदस्थ रहने का निर्देश दिया।
CMHO कार्यालय ने किया आदेश का पालन, फिर भी एनएचएम ने दिखाई हठधर्मिता
28 जुलाई को लवी पाण्डेय ने CMHO कार्यालय में उपस्थित होकर न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए सेवा जारी रखने का निवेदन किया। CMHO कार्यालय ने तत्परता दिखाते हुए कार्यरत प्रदीप द्विवेदी (BAM) को पुनः सीएचसी सिरमौर भेज दिया। परंतु इसके ठीक तीन दिन बाद 1 अगस्त को NHM कार्यालय ने नया आदेश क्रमांक 20254 जारी करते हुए फिर से वही दोहराया – लवी पाण्डेय को रीवा जिला अस्पताल और प्रदीप द्विवेदी को सिरमौर भेजे जाने का दोहराव।
न्यायालय की अनदेखी और अधिकारी की अनुपस्थिति: कौन जिम्मेदार?
लवी पाण्डेय ने तत्काल कार्यभार संभाल लिया, जबकि प्रदीप द्विवेदी न तो सीएचसी सिरमौर पहुँचे और न ही आदेश का पालन किया। आज तक वे घरों में आराम फरमाते नज़र आ रहे हैं, जो न केवल प्रशासनिक शिथिलता बल्कि खुलेआम सरकारी अवहेलना का मामला बनता है।
प्रशासन की चुप्पी या मिलीभगत? उठते हैं ये ज़रूरी सवाल
क्या CMHO और NHM कार्यालयों के आदेश अब केवल कागजों तक सिमट कर रह गए हैं?
क्या प्रदीप द्विवेदी को किसी उच्च अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है, जो वे न्यायालय और प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं?
क्या यह मामला केवल लापरवाही का है या फिर इसमें ऊँचें स्तर तक फैला भ्रष्टाचार भी शामिल है?
जनता के अधिकारों पर प्रहार, प्रशासनिक जवाबदेही ज़रूरी
यह मामला केवल एक कर्मचारी के तबादले का नहीं, बल्कि न्यायपालिका के आदेशों की साख, प्रशासनिक अनुशासन और जनस्वास्थ्य की रक्षा से जुड़ा है।
📌 ✍️ विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा/मऊगंज मध्यप्रदेश
स्वास्थ्य सेवाएँ जनसरोकार की रीढ़ हैं, इन्हें अफसरशाही की लापरवाही का शिकार नहीं बनने दिया जा सकता!

