गंगेव में उपमुख्यमंत्री का कार्यक्रम अव्यवस्था की भेंट—भीषण गर्मी में प्यास से तड़पती रही जनता, सरपंच का अपमानजनक बयान और सीईओ की हठधर्मिता ने खोला पोल
रीवा/गंगेव। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के जन्मोत्सव कार्यक्रम ने विकास की तस्वीर दिखाने के बजाय जनपद गंगेव की बदइंतजामी और जिम्मेदार अधिकारियों के घमंड को उजागर कर दिया। हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में भीषण गर्मी और धूप में जनता घंटों प्यास से तड़पती रही, लेकिन प्रशासन और आयोजन समिति दोनों ने मुंह फेर लिया।
ग्रामीणों की गुहार, सरपंच का तंज
कार्यक्रम में पानी की जिम्मेदारी पिपरवार सरपंच नटवरलाल तिवारी को दी गई थी। लेकिन जब प्यास से बेहाल जनता ने उनसे पानी मांगा तो उन्होंने न केवल इनकार किया बल्कि अपमानजनक शब्द कह डाले। ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच ने तंज कसते हुए कहा—
👉 “जिसके बुलावे पर आए हो, उसी से पानी मांगो... जनपद में वही होगा, जो मैं चाहूंगा।”
जनता ने इसे खुलेआम अपमान और अहंकार की पराकाष्ठा बताया।
सीईओ का ‘नाम मात्र’ बचाव
जनपद सीईओ प्राची चौबे ने व्यवस्था का बचाव करते हुए दावा किया कि—
एक टैंकर (पूर्वा-310) पानी से भरा खड़ा था,
छह बोरियां पानी के पाउच और 50 कैरेट बोतलबंद पानी मंगाया गया था, लेकिन कैरेट में कितने लीटर का पानी था यह तो पता नहीं कि 1 लीटर का था 200ml का
साथ ही नाश्ते की भी व्यवस्था की गई थी।
लेकिन असलियत यही रही कि बोतलबंद पानी केवल वीआईपी मेहमानों तक सीमित रहा। आम जनता प्यास से तड़पती रही। सवाल उठता है कि जब हजारों की भीड़ जुटनी तय थी, तो क्या यह नाममात्र की व्यवस्था पर्याप्त थी? या सिर्फ कागजों में खानापूर्ति के लिए की गई?
फर्जी खबर कहकर जनता को अंधेरे में रखने की कोशिश
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सीईओ ने इस अव्यवस्था को फर्जी खबर बताकर खारिज कर दिया और भविष्य में ऐसी खबरें न चलाने की नसीहत दी।
इतने बड़े आयोजन के बावजूद न तो कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई और न ही जनता की पीड़ा पर कोई संवेदनशीलता दिखाई गई। उल्टे जिम्मेदारी से बचने और अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए अधिकारियों ने समाचार को ही झूठा ठहरा दिया।
जनता का गुस्सा, प्रशासन पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि अब उनकी सहनशीलता की सीमा टूट चुकी है। गंगेव की यह तस्वीर केवल एक कार्यक्रम की अव्यवस्था नहीं बल्कि जनपद पंचायत की असलियत है, जहां अधिकारी और सरपंच जनता को सेवक नहीं बल्कि अपना गुलाम समझने लगे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है—
👉 अगर उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में जनता को पानी जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिल सकी, तो आम दिनों में गंगेव की हालत कैसी होगी?

