मनगवा तहसील में राजस्व आदेशों की अनदेखी से भड़का भूमि विवाद, ग्राम पंचायत लोरी खुर्द का मामला
रीवा जिले की तहसील मनगवा के अंतर्गत ग्राम पंचायत लोरी खुर्द, ग्राम लोरी नंबर 3 में जमीन विवाद का मामला लगातार गहराता जा रहा है। शासन-प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों और न्यायालयीन आदेशों के बावजूद राजस्व विभाग की निष्क्रियता के चलते अब स्थिति विस्फोटक बनती जा रही है।
विवादित भूमि: खसरा क्रमांक 164/1, 2/164/1/1
ग्राम लोरी नंबर 3 में खसरा क्रमांक 164/1, 2/164/1/1 से संबंधित जमीन पर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। मामला पहले तहसील न्यायालय, फिर एसडीएम न्यायालय और अंततः रीवा संभाग के अपर आयुक्त न्यायालय तक पहुंच गया।
हालांकि, दो स्पष्ट आदेशों के बावजूद जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया, जिससे कानून व्यवस्था पर संकट मंडराने लगा है।
पहला आदेश: अपर आयुक्त, रीवा संभाग (23 जुलाई 2025)
न्यायालय अपर आयुक्त, रीवा संभाग ने पत्र क्रमांक 0308/अपील/2025–26 दिनांक 23.07.2025 को आदेश पारित करते हुए तहसीलदार मनगवा एवं एसडीओ मनगवा को निर्देशित किया था कि:
“ग्राम लोरी नंबर 3 (तहसील मनगवा) के भूमि विवाद प्रकरण में, पूर्व आदेश दिनांक 17.06.2025 और 18.08.2025 के अनुसार भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए एवं रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।”
इस आदेश में पहले से ही यह उल्लेख किया गया था कि तहसीलदार मनगवा द्वारा पारित आदेश क्रमांक 0097/37-70/2023-24 दिनांक 29.10.2024 का पालन नहीं किया गया है।
दूसरा आदेश: नायब तहसीलदार गंगेव, तहसील मनगवा (22 अगस्त 2025)
इसके बाद नायब तहसीलदार गंगेव, तहसील मनगवा ने दिनांक 22.08.2025 को आदेश क्रमांक 1075/रीडर/2025 के तहत निर्देश जारी किए:
“ग्राम लोरी तीसरा में विवादित भूमि पर कब्जा हटाने हेतु 29.08.2025 को प्रातः 11 बजे हल्का पटवारी, थाना प्रभारी एवं संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में स्थलीय कार्रवाई की जाए।”
इस आदेश में साफ लिखा गया कि कब्जा हटाने की कार्यवाही पूर्व आदेशानुसार अब तक नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है।
आदेशों के बावजूद कार्रवाई ठप, तनाव चरम पर
आज दिनांक 31 अगस्त 2025 तक, न तो कब्जा हटाया गया और न ही कोई स्थलीय कार्रवाई की गई। ग्राम पंचायत लोरी खुर्द की जनता प्रशासन की इस निष्क्रियता से आक्रोशित है। पीड़ित पक्ष द्वारा एक वीडियो जारी कर अपनी व्यथा साझा की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि प्रभावशाली पक्षों के दबाव में कार्रवाई टाली जा रही है।
कानून व्यवस्था पर मंडराता संकट
ऐसे भूमि विवादों में पुलिस की भूमिका सीमित होती है। जब तक कोई फौजदारी या मारपीट की स्थिति न बने, पुलिस सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। यदि विवाद हिंसक रूप लेता है तो पुलिस मेडिकल प्रमाण, प्रत्यक्षदर्शी और स्थिति के अनुसार IPC की धाराओं में प्रकरण दर्ज करती है।
लेकिन यदि समय रहते राजस्व विभाग द्वारा कानूनी कार्रवाई की गई होती तो शायद ये स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
प्रशासनिक लापरवाही या साजिश?
यह गंभीर प्रश्न है कि जब:
आदेश स्पष्ट थे,
तिथि तय थी (29.08.2025),
सभी अधिकारी सूचित थे,
तो अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
क्या यह राजस्व अमले की लापरवाही है या किसी पक्ष को संरक्षण देने की सुनियोजित रणनीति
न्याय में देरी, न्याय से इनकार
यह मामला दिखाता है कि कैसे प्रशासनिक निष्क्रियता न्याय को नकार सकती है। यदि समय पर कार्रवाई होती, तो विवाद टल सकता था। अब मामला केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बन चुका है।




